Short Story In Hindi
मैं रात को सो रही थी कि अचानक मुझे एहसास हुआ कि कोई मुझे मैं उनको पीछे से हटाना चाह रही थी, पर मेरी कोशिश नाकाम रही। फिर मैं जैसे जैसे दूर हो गयी। मैंने जीजू से कहा यह सब क्या है? वह बोले।
मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और जानता हूँ कि तुम भी मुझसे प्यार करती हो। अब दिखावा करने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि मैं जानता हूँ कि तुम मेरे साथ दोस्तों मेरा नाम सरिता है और मेरी उम्र अभी 19 साल है। मैं जवान और काफी हैंडसम लड़की हूँ। रंग मेरा एकदम गोरा है। यह कहानी मेरे और मेरे जीजा जी की है।
दोस्तों आपको क्या बताऊँ जब पहली बार उन्होंने मुझे वो दिया था, मेरी तो जान ही निकाल दी थी और उस दिन जीजाजी ने आनंद तो इतना दिया था कि मैं आज तक उस दिन को भुला नहीं पाई हूँ और ना ही अपनी पूरी जिंदगी में कभी भुला पाऊंगी। मैं नोएडा में अपने जीजाजी के साथ रहकर पढ़ाई करती हूँ।
मेरे जीजा जी को मेरे पिताजी बहुत प्यार करते हैं क्योंकि मेरे अलावा मेरी एक बड़ी बहन भी थी। मेरे पिताजी और जीजा जीके बीच गहरी दोस्ती है, वह रिश्तेदार कम और दोस्त ज्यादा है। मेरे जीजा जी बहुत ही हंसमुख इंसान हैं। वह सभी के हंसकर बातें के करते हैं, किसी को भी डांटते नहीं हैं।
Short Story in Hindi मेरी उम्र 20 साल की है, मैं देखने में बहुत सुंदर हूँ
वह एक कंपनी में जॉब करते हैं, लेकिन उनकी सैलरी लाखों में है। वह रोज़ जिम में जाते हैं, इस वजह से उनका बदन घाटीला है और वह अभी 28 साल के आसपास लगते हैं। वैसे तो रंग उनका सांवला है, लेकिन बहुत हैंडसम लगते हैं। वह एक दोस्त की तरह सहयोग करते हैं।
मेरी दीदी करीब 4 साल पहले एक बिमारी के कारण गुजर गई थी। मेरी दीदी के गुजर जाने के बाद मेरे पापा ने मुझे जीजा जीके साथ नोएडा भेज दिया। जीजा जी से बोले की यहाँ गांव में अच्छी पढ़ाई लिखाई नहीं होती है और शहर में पढ़ाई भी हो जाएगी और जीजू भी तैयार हो गए। गांव से आने के बाद मुझे लगा कि यहाँ की हवा बिल्कुल अलग है।
खुलापन ऐसा कि गांव में ऐसा हो तो मार कुटाई हो जाती। यहाँ की लड़कियां छोटे छोटे कपड़े पहन कर घूमती हैं। यहाँ पर लड़कियां अपने बॉयफ्रेंड के हाथों में हाथ डाल कर घूमती हैं। शुरुआत में मेरे लिए अजीब था लेकिन अब मैं शहर वाली हो गई हूँ। मुझे भी छोटे छोटे कपड़े पसंद आने लगे थे। कुल मिलाकर मैं बिल्कुल चेंज हो गई हूँ।
मेरे जीजा मुझे दोस्त की तरह व्यवहार करते है और उनका गठीला बदन देख कर मैं भी उनकी ओर आकर्षित होने लगी थी। मेरा बहुत ख्याल रखते थे। लगभग रोज़ ऑफिस से आते वक्त मेरे लिए पिज़्ज़ा, बर्गर जैसी फास्ट फुड आइटम्स लाते थे। छुट्टियों के दिनों में हम घूमने चले जाते थे और मॉल में ब्रांडेड कपड़ों की शॉपिंग करते थे।
अब मैं सिर्फ ब्रांडेड कपड़े ही पहनने लगी थी क्योंकि जीजा ने मुझे इसकी लत लगा दी थी और जीजा के साथ जब बुलेट बाइक पर घूमने जाती थी तब मुझे ऐसा लगता था कि लड़की अपने बॉयफ्रेंड के साथ हो। हाथों में हाथ डालकर घूमते हँसी मजाक करते थे। अब हम लोग इतने घुल मिल चूके थे।
धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे थे। जीजू का अपना दो प्लेट थे। जीजू के रूम के टीवी था। उनके रूम में बेड भी बहुत बड़ा था। तब हम अक्सर टीवी देखते देखते बेड पर ही सो जाया करते थे। अब मैं उनको गौर से देखा करती थी। मुझे ऐसा देखना बहुत अच्छा लगता था।
उनका भी आकर्षक मेरी तरफ तेजी से बढ़ रहा था। वह अक्सर मेरे और जब मैं उनकी तरफ देखने लगती थी तो वह शर्मा जाते थे। वह अब मुझे उस नजरों से देखते थे। आखिर वह भी तो एक जवान मर्द थे ना? मर्द जब काफी समय से औरत से दूर हो तो यह होना स्वाभाविक है।
हम अक्सर हँसी मजाक में एक दूसरे को थपकी मार देते थे। ये सब मुझे बहुत अच्छा लगता था। अब ये रोज़ का सिलसिला हो गया था। वह अक्सर मुझे पीछे से और मेरे गालों पर चिकोटी काट लेते थे और बोलते कैसी है मेरी गुड़िया? वह मुझे प्यार से गुड़िया बुलाते थे।
ऐसे ही 1 दिन जीजू स्नान कर बाथरूम से बाहर आ रहे थे, तभी वह फर्श पर फिसल गए और गिर पड़े। फिर मैं दौड़ कर गई और उनको सहारा देकर उठाया। उनको उठाते हुए मैंने उनका देख लिया और वह एक हाथ से अपना छुपाने लगे। मैं सहारा देकर उन्हें बैडरूम में लेकर गई। उनकी कोहनी और कमर पर चोट लग गई थी।
फिर मैंने उनको बेड पर लेट आया और जैसे तैसे उन्होंने तौलिया से अपने आपको ढका। मैंने पूछा जीजू कहाँ चोट लगी? तो बोले कमर पर और कोहनी पर तो मैंने कहा, आप इधर घूमिए, मैं दवाई लगा देती हूँ? वह चादर खींचे और उसे ढक कर घूम गए।
मैंने चादर उनके कमर तक हटाई और करीम से मालिश करने लगी। पूरा दिन उनका वह मेरी आँखों के सामने घूमता रहा। मेरा मन नहीं लगता और मन में तरह तरह के ख्याल आने लगे थे। पूरा दिन यही सोचकर गुजार दिया, लेकिन जीजू की कोहनी का दर्द फिर से बढ़ने लगा। शाम को उन्होंने अपने एक दोस्त को फ़ोन किया।
और सीधा हॉस्पिटल चले गए। मैं घर पर अकेली थी और मैं अपने बिस्तर पर लेट गई और मेरे दिमाग में घूमने लगा और मुझे कब नींद आ गई मुझे पता भी नहीं चला। जब भी मेरी नींद खुली तो मुझे अचानक याद आया और मैं दौड़ कर रूम की तरफ गई तो देखा कि अंदर से आवाज आ रही थी।
मेरे जीजू अस्पताल से आ गए थे और बाथरूम में गए हुए थे। फिर जीजू बाहर आए और मुझसे बोला, गुड़िया मेरे लिए चाय बना दो। हॉस्पिटल आने जाने में काफी थक गया हूँ। मैंने पूछा डॉक्टर ने क्या बताया? कहीं फ्रैक्चर तो नहीं है तो उन्होंने बोला कि नहीं बस से थोड़ी चोट है, दवाइयां दी है, एक 2 दिन में ठीक हो जाएंगे।
रात को खाना खाने के बाद में अपने कमरे में सोने के लिए चली गई। आज मैं जल्दी सोने चली गई, फिर कब मुझे नींद आ गई पता भी नहीं चला। लेकिन फिर कुछ समय बाद मुझे एहसास हुआ जैसे मुझे कोई की कोशिश कर रहा है। कमरे में लाइट बंद थी, लेकिन मैं समझ गई थी कि जीजू मेरे साथ वह कर रहे थे।
लेकिन मैं सोचने लगी कि मैं इसका विरोध करूँ या नहीं, क्योंकि अब मेरे में ज्वालामुखी फूटने लगा था, मैंने फैसला कर लिया कि देखते हैं जीजू क्या करते हैं? मैं बिना कोई हरकत किए हुए चुपचाप पड़ी रही। मुझे ज़ोर ज़ोर से करने की कोशिश करने लगे और मुझे भी मज़ा आ रहा था।
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इस कारण मैं अपने आपको संभाल पा रही थी। मुझे नहीं पता था कि जीजू के मन में क्या चल रहा है? मैंने उनसे कहा यह सब गलत है, पर वह बोले मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ और जानता हूँ कि तुम भी मुझे चाहती हो। अब चलो असली क्रिकेट का आनंद लेते हैं। मैं डर रही थी और ऐसे में उनके साथ खुल गई थी।
और हम दोनों अब हर रोज़ रात को क्रिकेट खेलते थे। मेरे जीजू मुझे क्रिकेट का भरपूर मज़ा देते थे। दोस्तों, मैं आप सबको क्या बताऊँ, मुझे अलग ही मज़ा आ रहा था मेरे जीजू के साथ क्रिकेट खेलने का। मेरे जीजू ने मुझे ज़िन्दगी का असली मज़ा दे दिया था। तो दोस्तों कैसी लगी आप सबको? मेरी ये कहानी जीजू के साथ की।
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