Short Story In Hindi
मेरी पत्नी ममता बड़ी जिद्दी थी। मेरी कोई भी बात नहीं मानती। जब मैं उसे कोई काम करने का कहता तो वो रोने लग जाती। मुझे बड़ा गुस्सा आता था, मैं उसे तलाक भी नहीं दे सकता था। इसीलिए 1 दिन मैंने अपने चार आवारा दोस्तों को घर पर बुलाया और उन्हें शराब पिलाकर।
ममता के कमरे में भेज दिया। सोचा कि अब उस पर इलज़ाम लगाकर उसे तलाक दे दूंगा। मगर 1 घंटे के बाद जब मैं ममता के कमरे में गया तो मेरी जान निकल गई थी क्योंकि सामने तो मेरी पत्नी बेड पर लेटी हुई थी और मेरे चारों दोस्त एक। साथ ही उसके साथ।
मेरी उम्र तो उस समय 25 साल थी, लेकिन मैं अभी शादी के लिए तैयार नहीं था। एक रात रूटीन के अनुसार मैं घर वापस आया तो मेरी माँ ने मुझे एक अजीब सी बात कह दी। कहने लगी बेटा तुम्हारे बड़े भाई की शादी है, इसीलिए तुम कुछ दिन की छुट्टी ले लो
मुझे हैरत हुई थी कि शादी से पहले कोई भी बात मुझे नहीं बताई गई थी। अचानक ही भाई की शादी भी फिक्स हो गई थी और मुझे पता भी नहीं चला था। पर मैं क्या जानता था की भाई की शादी के दिन मेरे साथ जो होगा वो मेरी ज़िन्दगी को बदल के रख देगा। मेरे भाई की शादी।
मेरी माँ की जानने वाली एक औरत की बेटी से तय होना पाई गई थी। मम्मी अपनी सहेली की उस बेटी के लिए बहुत ज्यादा खुश थी और एक्साइटेड भी बहुत थी। वो लड़की उनकी बहू बन जाएगी, लेकिन मेरा भाई सादी से खुश नहीं था। इसीलिए मैंने सोचा कि भाई का दिल बहलाऊंगा।
उसे खुश करूँगा उसे हसाऊंगा लेकिन मुझे क्या पता था कि भाई को हँसाने के चक्कर में मेरे रोने के दिन करवा रहे थे। मुझे मालूम नहीं था मैं भी अपनी क्लास की एक लड़की ज्योति से मोहब्बत करता था। उसी से शादी भी करना चाहता था, लेकिन शायद ज्योति मेरी किस्मत में नहीं थी।
भाई की शादी की पूरी तैयारियां हो चुकी थी। मंडप में पंडित जी दूल्हा दुल्हन का इंतजार कर रहे थे, जो कुछ ही देर में दुल्हन को मंडप में लाकर बिठा दिया गया था, लेकिन भाई का कहीं पता नहीं था। हर कोई दूल्हे को ढूंढने में लगा था। सारे कमरे तलाश कर लिए गए।
लेकिन नहीं मिला और फिर पता चला कि भाई तो घर में ही मौजूद नहीं है। मेरी माँ ने मुझे भाई को ढूंढने के लिए बाहर भी भेजा। मैं कई जगह गया। भाई के दोस्तों को भी कॉल लगाया जहाँ मुझे उम्मीद थी कि भाई हो सकते हैं। मैंने हर जगह ढूंढा लेकिन मैं नाकाम रहा।
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मुझे भाई कहीं भी नहीं मिले। अगर मुझे पता होता कि वापसी पर मुझे किन समस्याओं का सामना करना पड़ेगा तो शायद मैं भी अपने भाई के साथ पीछे पीछे भाग जाता, लेकिन मैं इन सब बातों से अनजान था और मैं वापस घर आ गया था।
मैं जब घर वापस आया और मैंने माँ को कहा कि माँ भाई का कहीं पता नहीं है तो मेरी माँ ने रोना शुरू कर दिया। मैं उन्हें चुप करवाने लगा। तसल्ली देने लगा, लेकिन उन पर मेरी तसल्ली का कोई भी असर नहीं था। रोते रोते उन्होंने मेरे आगे हाथ जोड़ दिए। बोली बेटा भगवान के लिए?
मेरी इज्जत रख लो वरना मैं तुम्हें भी कभी माफ़ नहीं करूँगी। एक बेटे ने तो मेरी इज्जत की पहले ही धज्जियां उड़ा दी हैं। अब एक तुम्हारा ही सहारा है अगर तुम ऐसा करोगे तो मैं तुम्हें भी माफ़ नहीं करूँगी। मेरे बच्चे मैंने तुम्हें पाल पोस कर बड़ा किया है।
भगवान के लिए मेरा मान रख लो वरना मैं किसी को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहूंगी। लड़की वाले क्या सोचेंगे कि उनकी बेटी का मजाक उड़ाया गया है? हम सब पे लोग।
उंगलियां उठाएंगे कि जब बेटे की मर्जी नहीं थी तो किसी दूसरे की लड़की की जिंदगी खराब करने का तुम्हें कोई हक नहीं था। अब तुम्हें ही मेरी मदद करनी है। माँ की बात सुनकर मैं हैरान था। मैंने कहा माँ लेकिन मैं क्या कर सकता हूँ?
मेरी माँ सुनकर मेरी माँ फिर से रोने लगी। बोली बेटा बस अब तुम ही उस लड़की से शादी कर लो वह लड़की ममता बहुत ही अच्छी सुलझी हुई बच्ची है तुम्हें हमेशा खुश रखेगी। माँ की बात सुनकर मैं हैरान था। मैंने एकदम ना ही सिर हिला दिया। मैंने कहा लेकिन माँ
मुझे इस टाइप की घरेलू लड़कियां पसंद नहीं हैं, जैसा कि वह लड़की ममता है। मुझे तो आजकल के जमाने की नई लड़कियां पसंद है। मैं उस लड़की से शादी नहीं कर सकता। मैं थोड़ा चिढ़कर बोला था मगर माँ के आंसुओं में और भी ज्यादा तेजी आ गई थी।
अब मैं अपनी माँ को और ज्यादा रोता नहीं देख सकता था और फिर मेरे पापा ने एक ऐसी बात कह दी जिसने मेरा हौसला बढ़ाया था, बल्कि मेरे दिल में लालच की एक नई दुनिया आबाद हो गई थी। पापा उस समय बड़े गुस्से में थे। कहने लगे बेटा तुसाड ने तो ठीक समय पर।
हमें धोखा दे दिया और घर से भाग गया। वो अगर हमें पहले बता देता तो शायद हम उसका रिश्ता यहाँ पे तय ही ना करते, मगर ऐसी औलाद का क्या भरोसा जो भरे जमाने में इंसान को रुझवा कर दे? मैं अब उसे अपनी जायदाद में से फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा। मेरी जितनी भी जायदाद है।
ये घर बैंक बैलेंस सब तुम्हारे नाम करूँगा। अगर तुम उस बच्ची से शादी कर लेते हो तो उसे अपनी इज्जत बनाते हो तो मैं तुम्हें अपनी सारी जायदाद दे दूंगा और तुम्हारा बड़ा भाई उसमें किसी भी फूटी कौड़ी का भी हकदार नहीं होगा।
और फिर तुम ममता के साथ पूरी जिंदगी खुशी खुशी गुजार सकते हो। पापा की बात सुनकर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए थे, पापा की बहुत सी जायदाद और जमीने थी। आज तक पापा ने हमें उसकी हवा भी नहीं लगने दी थी। पापा का ख्याल था।
की औलाद को पहले माँ बाप की जायदाद के बारे में नहीं, बल्कि औलाद को ये बताना चाहिए कि उनके ऊपर उनके माँ बाप के क्या क्या हक हैं, अपने माँ बाप की कैसे सेवा करनी है? नहीं तो औलाद जायदाद के लालच में और उसके बंटवारे के चक्कर में पड़ जाती है।
पापा के मुँह से जायदाद की बात सुनकर मैंने हाँ कर दी। मेरी हाँ, सुनते ही मेरे माँ बाप तो मुझ पर अपनी जान न्योछावर करने लगे थे। पापा ने कहा कि बेटा तुमने मेरा दिल खुश कर दिया है, देखना मैं भी तुम्हें खुश कर दूंगा, इतना कुछ दूंगा।
की तुमने सोचा भी नहीं होगा। पापा की बातें सुनकर मुझे एक नया हौसला मिला था। मैंने उसी वक्त मंडप में बैठकर ममता के साथ शादी कर ली थी। मेरे दिल में अब नए नए लड्डू फूट रहे थे। पापा के पास जो जायदाद थी, अब मैं बेच भी सकता था।
और उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वो जायदाद तो मेरे नाम होने वाली थी और मैं उनसे यही कहता की मैं नया कारोबार करूँगा, इसलिए मुझे जमीनें बेचनी पड़ेगी। मेरे इस कदम से सब लोग मेरे अहसान तले आ गए थे क्योंकि मेरी माँ अच्छे से जानती थी। मुझे ऐसी लड़कियां पसंद नहीं थी।
लेकिन अब मैंने उनका मान रख लिया था और मैं सबकी आँखों का तारा बन गया था। खैर, मैं ममता को विदा करवा कर घर ले आया। दो। एक रस्मों के बाद ममता को मेरे कमरे में बिठा दिया गया था। थोड़ी ही देर के बाद मैं भी कमरे में दाखिल हुआ।
पूरा कमरा फूलों और खुशबूओं की महक से चमक रहा था। मेरे सामने गांव की एक खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी लेकिन मुझे उससे कोई मोहब्बत नहीं थी और ना ही कोई उसके लिए बेकरारी थी, क्योंकि मुझे उससे मोहब्बत ही नहीं थी तो उसके लिए मेरी तरफ से कैसी मोहब्बत?
मैंने तो दौलत के लालच में आकर उससे शादी की थी। मैं तो उसकी शक्ल भी देखना गवारा नहीं करता था, क्योंकि मुझे तो शहर की रंगबिरंगी लड़कियां पसंद थी। मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि औरत खूबसूरत कितनी है? मैं ये देखता था औरत बोलती कैसे है, उसका मिजाज़ कैसा है?
उसकी पर्सनालिटी कैसी है, उनमें अदाएं कितनी हैं। बस यही बातें मेरे ऊपर असर करती थी। खैर, पहले मैंने ममता को नहीं देखा था, लेकिन अपनी माँ के मुँह से ममता की तारीफें बहुत सुनी थी की बहुत ही प्यारी बहुत ही खूबसूरत बच्ची है।
लेकिन मेरा दिल ममता से बोलने को बिल्कुल भी नहीं कर रहा था। वो घूंघट डाले बेड पर बैठी हुई थी और मैं अपनी शेरवानी उतार कर हैंगर में लगाने लगा और फिर उसके बाद अपनी घड़ी उतारने लगा। शायद ममता इस इंतजार में थी कि मैं उसे आवाज दूंगा यह उसके पास बैठकर।
उसका गूंगा ठटाऊँ लेकिन मुझे इस काम की कोई भी जल्दबाजी नहीं थी। मेरी तरफ से खामोशी पाकर ममता से शायद बर्दाश्त नहीं हुआ था और उसने बहुत ही पतली सी आवाज में मुझसे बोला था, नमस्ते जी, उसके इन शब्दों पर तो जैसे मुझे आग सी लग गई थी। गुस्से से मैंने कहा।
कर दी ना तुमने वही गवार वाली बात शादी की पहली रात अपने पति को ये नमस्ते जी कौन कहता है? मेरी इस बात पर बजाए शर्मिंदा होने के वो हंसने लगी, अपना उलट दिया। कहने लगी आपने तो वो भी नहीं किया। मुझे उनकी इस बात पर गुस्सा आया।
मैंने कहा तुम मुझसे अभी से गिले शिकवे कर रही हो मेरी बात काटते हुए बोली भगवान ना करें कि मैं आपसे गिला या शिकवा करूँ, मैं तो ऐसा कभी सोच भी नहीं सकती। अब तो मैं सारी जिंदगी आपके ही साथ रहूंगी और आपकी हमेशा वफादार बनकर जिंदगी भर सेवा करूँगी।
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आपकी आज्ञा का पालन ना करूँ ऐसा तो मैंने सोचा ही नहीं। ममता की इतनी हाँ हुजूरी और इतनी सारी गाय वाली नेचर देखकर मुझे अजीब सी खुशी हुई थी। मैं जानता था ऐसी पत्नी पतियों के सामने जवान नहीं खोलती। अब मुझे पूरी आजादी मिलेंगे कि मैं जो चाहूंगा वो करूँगा।
मैंने कहा अच्छा चलो ठीक है, कपड़े बदल कर सो जाओ, मैं थक गया हूँ। मैं खुद को लापरवाह रखने की कोशिश कर रहा था जी अच्छा कहकर उठकर वो बाथरूम में चली गई थी। मेरी नजर उसके पांव पर पड़ी तो मैं देखता ही रह गया था। उसके पांव तो बहुत ही मुलायम और दूध की तरह सफेद थे।
लगता था जैसे ये पैर जमीन पर रखने के लिए बने ही नहीं बल्कि फूलों की तरह नाजुक मुलायम पैर इन्हें तो बस फूलों पर ही चलना चाहिए। उसके पैरों की एक खूबसूरती देख कर मैं तो हैरान रह गया था। अब मेरी नजर उसके चेहरे की तरफ उठी थी।
इससे पहले मैंने उसके चेहरे को देखना जरूरी नहीं समझा था और अब जब उसके चेहरे को देखा तो मैं नजरें हटाना भूल गया था। कैसी अजीब सी चमक थी उसके चेहरे पे, जो सामने वाली को अपनी तरफ खींच रही थी। दुल्हनों वाला मेकअप उसके चेहरे पर नहीं था।
एकदम साफ चमकता हुआ चेहरा था जो मेरे सामने था। वो धीरे धीरे कदम उठाती हुई वाशरूम में चली गई थी। मुँह धोकर जब बाहर निकली तो मैं उसे देखता ही रह गया था। अचानक ही मेरे दिल में उसके लिए अजीब से जज्बात उभरने लगे थे। जी चाहा कि इस प्यारी और मासूम सी लड़की को
अभी के अभी अपनी बाहों में समेट लूँ और उस पर अपनी सारी उल्फतें लुटा दूँ, लेकिन अचानक ही मेरे दिमाग में वो सारी लड़कियां घूम गई थी जो मेरे आगे पीछे घूमा। फिरा करती थी। मेरे ऊपर अपनी जान छिड़कती थी मेरे लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थी शहर की ऐसी रंगीन तितलियां।
जब मेरी आगे पीछे मंडराती थी तो फिर मैं एक गांव की गवार लड़की को अपने आप क्यों सौंपता? ममता में ऐसा क्या खास था? सिर्फ शकल ही खूबसूरत थी ना उसमें अदाएं थी, ना बात करने का हुनर था, ना ही पढ़ी लिखी थी, हरगिज़ नहीं। मैंने अपने दिल में सोचा और बाहर आ गया।
लॉन में आकर मैं सिगरेट पीने लगा था। थोड़ी ही देर के बाद मेरी माँ वहीं पे आ गई। मेरे सर पे हाथ फेरते हुए बोली बेटा परेशान मत हो तुम्हारी पत्नी ममता लाखों में एक है तुम देखना जिंदगी भर वो तुम्हें खुश रखेगी, कभी तुम्हें शिकायत का मौका नहीं देगी।
बहुत ही खास बच्ची है और तुम तो किस्मत वाले हो जो तुम्हें ऐसी पत्नी मिली है। ऐसी लड़कियां तो आजकल ढूंढने से भी नहीं मिलती मैंने कहा, हाँ माँ आप सही कहती हैं, मैं तो आपकी इज्जत और आपकी माँ के लिए ये सब किया है मेरी माँ मुझे दुआएं देने लगी।
कहने लगी चलो जाओ, नई नवेली दुल्हन है, तुम उसके पास जाकर बैठो और इसका दिल बहलाओ हाँ मैं जा रहा हूँ। मैंने बहुत ही आज्ञाकारी बच्चे की तरह सर झुकाकर कहा था और अंदर आ गया था। मैं अंदर आया फिर हैरान हो गया था।
क्योंकि कमरे के कोने में लगे एक मंदिर के सामने वो आंखें बंद किए और हाथ जोड़े खड़ी थी। जैसे पता नहीं भगवान से क्या मांग रही हो। उसे अपने आसपास की भी खबर नहीं थी। उसे इतना खुश दिल देखकर मेरा दिल चाहा की मैं उसे तंग करूँ। मैंने अंदर आते ही ताना मारते हुए कहा।
कि तुमने शादी से पहले ऐसे कौन से पाप किए थे कि अब तुम्हें भगवान से उनकी माफिया मांगनी पड़ रही है। कोई तो वजह होगी, कोई तो पाप किया होगा तुमने अपने अतीत में मेरी बात सुनकर उसे गुस्सा नहीं आया था बल्कि वो अपनी आदत के अनुसार वो मुस्कुरा दी थी।
बोली, मैं तो आपकी लंबी उम्र की दुआ मांग रही थी और मैंने ऐसा कोई पाप नहीं किया है। वैसे तो हम सब पापी हैं, जाने अनजाने हर इंसान से गलती हो ही जाती है और हमे भगवान से माफी मांगते रहना चाहिए। भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए की वो हमे अच्छे रास्ते पर चलाए।
उसकी बात सुनकर मुझे फिर से गुस्सा आया था। मैंने कहा अच्छा तो तुम ये कहना चाहती हो कि मैं पापी हूँ और मैं नरक में जाऊंगा। मेरी बात सुनकर वो जल्दी से मेरे पैरों में बैठ गई थी। मेरे पैर छुए और कहने लगी भगवान ना करे जो मैं आपको ऐसी बात बोलूं।
ऐसी बात बोलने से पहले मेरी जबान कट जाए, मगर मुझे ये सब बनावटी लग रहा था। कहीं से भी मुझे उसकी इन हरकतों में सच्चाई नहीं लग रही थी। उसका सब्र मुझे और भी गुस्सा दिला रहा था अगर वो थोड़ा सा गुस्सा कर लेती, मुझसे शिकवे शिकायत कर लेती।
तो शायद मैं भी नॉर्मल हो जाता, ये समझता की वो भी मेरे जैसी ही है। पर वो तो ऐसे बनी हुई थी जैसे उस पर मेरे होने या ना होने का कोई फर्क नहीं था और उसकी यही शांति सब्र मेरे अंदर आग लगा रहा था। मुझे ऐसा लगता है जैसे वो मेरा मजाक उड़ा रही है।
उसके कपड़े, उसके चलने, फिरने और बोलने का अंदाज सभी अलग थे और उसकी इन हरकतों को देखते हुए मैं तो इतना समझ गया था कि वो बहुत ही नेक और पवित्र लड़की है। आज तक कभी किसी गैर मर्द की तरफ उसने नजर उठाकर भी नहीं देखा होगा।
अभी मैं उसके बारे में यही सब बातें सोच रहा था कि मेरे कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई थी। रात के 12:00 बजे थे। मुझे हैरानी हुई कि इस वक्त मेरे कमरे के दरवाजे पर कौन आ सकता है, कौन दस्तक दे रहा है? मैंने दरवाजा खोला तो सामने मेरे पापा ही खड़े थे।
आँखों में आंसू लिए चेहरे पर खुशी के मेले, झूले भाव थे। पापा मुझे देखते हुए मेरे गले लग गए। पापा की खुशी मेरी समझ से बाहर थी। मैंने कहा क्या बात है पापा? पापा ने कहा, बात ही कुछ ऐसी ही है कि खुश होना तो बनता है। तुम मेरे कमरे में चलो, मैं सब बताता हूँ।
मैं पापा के कमरे में गया तो कुछ कागजात उनके बेड पर बिखरे पड़े थे। ये क्या है? मेरे दिल में जायदाद वाली बात थी, इसीलिए मैं पूछ बैठा पापा खुशी, खुशी वो पेपर मुझे दिखाने लगे। बोले ऑफिस की तरफ से मेरी ऐप्लिकेशैन एक्सेप्ट हो गई है। तुम्हें तो पता है कि कितने ही दिनों से।
अपने ऑफिस में मैं ऐप्लिकेशैन डाल रहा था कि मुझे छुट्टियां दी जाए और मुझे चार धाम की यात्रा के लिए ऑफिस की तरफ से भेजा जाए और आज जाकर मेरी ऐप्लिकेशैन एक्सेप्ट कर ली गई है। मैं हैरान हो गया था वो कब से इस काम के लिए कोशिश कर रहे थे?
पापा और माँ के दिल में तीर्थयात्रा करने की बहुत ही ज्यादा लगन थी। मुझे पापा की खुशी देखकर खुशी महसूस हो रही थी। पापा कहने लगे बेटा मेरी इच्छा है कि मैं भी भगवान की जन्मभूमि के दर्शन करूँ, लेकिन तुम लोगों की जिम्मेदारियां मेरे पैरों में जंजीरें डाले हुए थीं।
अब तुम्हारी शादी हो गई है और मुझे पता है तुम्हारा बड़ा भाई अपने दोस्त के घर है, अब मुझे उसकी कोई चिंता नहीं। वो जहाँ चाहे अपनी मर्जी से शादी कर ले और हाँ तुम्हारी पत्नी बहुत ही अच्छी लड़की है, देखना वो तुम्हें संभाल लेगी, तुम्हें भटकने नहीं देगी। इसीलिए मैंने सोचा है।
की मैं ये काम भी कर लूँ। फिर अगले साल भगवान ने चाहा तो दोबारा से पूरे परिवार के साथ चलेंगे। पापा बहुत खुश थे और साथ ही साथ मुझे इस बात की खुशी थी की माँ और पापा एक महीने के लिए जा रहे थे। अब उस पूरे घर में मैं अकेला होता और मैंने सोच लिया था।
की मैं ममता के साथ ऐसा काम करूँगा की फिर मुझे ममता को तलाक देने की नौबत ही नहीं आएगी बल्कि वो खुद ही ये घर छोड़कर चली जाएगी। मैं दोबारा कमरे में गया और वो अभी भी वैसा ही नाटक कर रही थी। अब भी संस्कारी बहू बनने का उसके हाथ में गीता थी
और उसका वो पाठ कर रही थी। मैं उसके पास बैठ गया। मैंने कहा, ममता क्या तुम वाकई इतनी पवित्र और धार्मिक लड़की हो कि हर वक्त भगवान की पूजा पाठ में लगी रहती हो? और क्या तुमने कभी किसी गैर मर्द की तरफ निगाह उठाकर भी नहीं देखा?
मेरी बात पे वो अपने कानों को हाथ लगाने लगी और बोली मेरा भगवान जानता है कि मैंने कभी किसी गैर मर्द को गलत नजरों से नहीं देखा और ना ही मैं किसी गैर मर्द के साथ बैठना पसंद करती हूँ। मैंने कहा फिर तो तुम मेरे दोस्तों के सामने भी आना पसंद नहीं करोगी।
तो कहने लगी हाँ जी ऐसा ही है। मैं आपके दोस्तों के सामने भी नहीं आऊंगी। मैंने कहा अच्छा तो फिर ठीक है, मैं तुम्हें तुम्हारे माँ बाप के घर छोड़ देता हूँ, क्योंकि जब तुम यहाँ से जाओगी तो मैं अपने दोस्तों के को घर पर बुलाऊंगा।
मम्मी पापा तीर्थ यात्रा के लिए जा रहे हैं और तुम्हें तो पता है ये मौका बार बार नहीं आता। मेरे दोस्त मेरे घर आना चाहते हैं। मेरे दो दोस्त विदेश में नौकरी करते हैं और मेरी शादी की वजह से वो छुट्टियां लेकर आए हैं। हम सब दोस्त बचपन के दोस्त हैं।
और हम आपस में खूब सारा टाइम बिताना चाहते है। अपने बचपन की सारी यादें ताजा करना चाहते है। इसीलिए हमें अकेलेपन की जरूरत है। जो की ये घर पर ही हो सकता है तो मैं चाहता हूँ की तुम हम दोस्तों के बीच में किसी भी तरह की कोई डिस्टर्बेंस ना करो।
इसीलिए अपने माँ बाप के घर चली जाओ। वो मेरी बात फौरन ही मान गई थी। कहने लगी, लेकिन मेरी एक शर्त है, मैंने कहा वो क्या कहने लगी वो मैं आपको थोड़ी देर के बाद बताऊंगी। ये कहकर वो कमरे से बाहर चली गई थी और मम्मी पापा को बधाई देने लगी कि वो तीर्थ यात्रा पर जा रहे थे।
और मैं अंदर बैठा यही सोच रहा था कि आखिर ममता के दिमाग में ऐसी कौन सी शर्त होगी जो वो मेरे साथ रखना चाहती है? मैंने अपने सारे दोस्त और गर्लफ्रेंड को भी बता दिया था कि मेरे मम्मी पापा एक महीने के लिए जा रहे हैं तो मेरे घर पर पार्टी के लिए आ जाना बल्कि अब तो।
हर रोज़ मेरे घर पर पार्टी हुआ करेगी। हम सारे लड़के लड़कियां मिलकर रात भर मौज मस्ती करेंगे। मैं बहुत खुश था और मेरे सभी दोस्त भी अपनी सारी गर्लफ्रेंड के साथ आने के लिए तैयार थे। मेरे ज्यादातर दोस्त बहुत अमीर तो नहीं थे।
लेकिन बेशर्मी के काम में उनका जवाब नहीं था। हर एक दोस्त की अपनी अपनी गर्लफ्रेंड थी और उनके बीच हर तरह के रिश्ते भी बन चूके थे। अपने दोस्तों की इन हरकतों की वजह से मैं कई बार मुश्किल में भी पड़ चुका था, लेकिन मेरे माँ बाप का पैसा था जो मुझे हर बार बचा लेता था। खैर।
अब तो मुझे चिंता करने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि अब तो मेरे ही घर में पार्टी हुआ करती। मैं बहुत सुकून से था कि कौन सा हम लोग किसी होटल में जाएंगे जो पकड़े जाएंगे। मज़े की बात तो ये थी कि मेरे किसी दोस्त को ये नहीं पता था कि मेरी शादी हो चुकी है।
ममता से तो मैंने झूठ बोल दिया था कि मेरे दो दोस्त मेरी शादी में शामिल होने के लिए विदेश से आए हुए थे और मैं अपनी शादी वाली बात किसी को बताना भी नहीं चाहता था क्योंकि मैं नहीं चाहता था। मेरे दोस्तों को पता चले कि मेरी पत्नी गांव की गवार लड़की है।
और वो मेरा मजाक उड़ाये। थोड़ी देर के बाद ममता मेरे पास आयी। तुम मुझे अजीब सी नजरों से देखने लगी जैसे वो मेरे बारे में सब कुछ जानती हो। कहने लगी हर्ष एक बार एक बार पूछूं सच सच बताना। मैंने कहा हाँ पूछो।
कहने लगी कि आप सच में अपने दोस्तों को पार्टी देना चाहते हैं? मैंने कहा हाँ देना चाहता हूँ, तुम्हें कोई शक है, अगर तुम यहाँ रुकना चाहती हो तो रुक सकती हो और अपनी आँखों से देख लेना तुम्हारी मर्जी है, लेकिन मैं तो तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा था, तुम हम दोस्तों की पार्टी में।
फिट नहीं बैठोगी क्योंकि तुम अलग नेचर की लड़की हो, तुम परेशान हो जाओगी। इसीलिए तुम्हें तुम्हारे माँ बाप के घर भेज रहा हूँ। वो मुझे कुछ देर तक देखती रही। फिर बोली, हाँ, वो तो ठीक है कि मैं तुम्हारे दोस्तों की पार्टी में शामिल नहीं होना चाहती, लेकिन मुझे आपके लिए अफसोस है।
और डर भी लग रहा है कि कहीं आपके साथ कुछ गलत ना हो जाए। मैं चौक कर बोला कुछ गलत क्यों होगा? मेरे साथ वो कहने लगी, जब तक आप अच्छाई और बुराइ के अंतर को समझ ना ले तब तक मैं कुछ कह नहीं सकती और ना ही मैं आपको जबरदस्ती अपनी बात मनवा सकती हूँ।
मैंने कहा हाँ, सही बात है, मनमाने की कोशिश भी मत करना। तुम जानती हो कि मैं तुमसे ये शादी अपनी खुशी से नहीं की है, बल्कि मम्मी पापा की खुशी की खातिर की है, वरना तो तुम्हारे होने वाले दूल्हे शादी के ठीक समय पहले तुम्हे छोड़कर भाग गया था।
और अभी तक वापस नहीं आया। बस फ़ोन करके बता दिया है कि तुमसे शादी नहीं करना चाहता और अपने दोस्त के घर पर है। यकीनन कोई ना कोई तो वजह होगी जो वो तुमसे शादी नहीं करना चाहता था। कुछ ना कुछ तो किया होगा तुमने या फिर।
तुम्हारी बातों में उसे कुछ ऐसा महसूस हुआ होगा और मेरे भाई को लगा होगा कि तुम्हारा कैरेक्टर या तुम्हारी नीयत सही नहीं है। इसीलिए तुम्हें छोड़कर भाग गया। मेरी ये बातें सुनकर ममता के चेहरे पर दुख के भाव उमड़ आए थे और देखते ही देखते।
उसकी आँखों में आंसू तैरने लगे। आखिर को वह भी एक लड़की थी, लेकिन मैंने उसे चुप कराने की कोशिश नहीं की थी बल्कि उसे यूं ही रोता छोड़कर बाथरूम में चला गया था। खैर, शादी की पहली रात हमारी यूं ही निकल गई थी। मैंने उसे हाथ भी नहीं लगाया था।
मैं बाथरूम से आकर सीधा सोफे पर लेट गया और उसने भी मुझे कुछ नहीं कहा था। वो आराम से बेड पर सो गई थी। अगले ही दिन मम्मी पापा चले गए थे। कहने लगी की आप भी मुझे अब मेरे माँ बाप के घर छोड़ आओ, मैं अपने मायके जाना चाहती हूँ। मैंने कहा 1 दिन और रुक जाओ।
और वैसे तुमने भी तो अपनी एक शर्त मनवानी थी वो तो तुमने बताई ही नहीं, तो कहने लगी मेरी शर्त तो कुछ भी नहीं थी। बस इतनी सी थी कि आप सुबह सवेरे उठ जाया करना और भगवान की आरती करके अपने दिन की शुरुआत किया करना जब आप भगवान का नाम लेकर।
अपना दिन शुरू करते हैं तो भगवान भी आपसे खुश होते हैं और आपको हर मुश्किल से बचाते हैं। सुबह सवेरे भगवान को जरूर याद करना चाहिए, चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए। मुझे उसकी ये बात अच्छी लगी थी। मैं उसकी बात सुनकर इम्प्रेस हुआ था। मुझे तो लगा था।
कि वो मुझसे पैसे मांगेगी या फिर कोई और जिद करेगी। लेकिन उस बेचारी ने तो मेरे ही फायदे की बात की थी। इस बात पर मैं थोड़ा शर्मिंदा भी हुआ था और परेशान भी कि मैंने उसे गलत समझा था। वो तो मेरे ही भले की बातें सोच रही थी। खैर, ऐसी सब बातों से तो।
उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो तो सब्र का पुतला बनी हुई थी। थोड़ी देर के बाद ही उसने अपना सामान पैक कर लिया। मैं दिल में उदास हो रहा था। पता नहीं क्यों उसके जाने पे अच्छा नहीं लग रहा था पर मैंने ये बात उस पर ज़ाहिर नहीं की थी। मैं उसे गाड़ी तक छोड़ आया था।
वो अपने माँ बाप के घर चली गई। उसके जाने के बाद घर में अजीब सी उदासी छा गई थी। जैसे एक नहीं 10 लोग घर से निकल गए हो। घर बहुत खाली खाली लग रहा था, मैंने घबरा कर जल्दी से अपने दोस्तों को कॉल लगाई, उनसे कहा घर खाली हो गया है, अब तुम लोग शाम को आ जाना।
मेरे दोस्त तो इसी मौके के इंतजार में थे। मेरे दोस्तों के आने से घर में एक नई रौनक सी लग चुकी थी। हर तरफ गानों की आवाज और धूम धड़ाके वाले डीजे बजने लगे थे और डीजे की थपाक थप से मेरे दोस्तों की गर्लफ्रेंड नाच रही थी। मैं इन सारी लड़कियों को पहले से ही जानता था।
मैंने सबके लिए छोटे छोटे गिफ्ट्स भी पैक कर रखे थे। जब मैं वो गिफ्ट्स उन्हें देता तो वो खुश होती थी। उसको यही तो चीज़ भाती थी। खाने पीने के बाद हमने डांस पार्टी की शुरुआत की थी। लड़के लड़कियां आपस में डांस करने लगे, बातचीत करने लगे।
लेकिन इसी बीच मुझे कुछ गलत होने का अहसास हुआ था। मुझे आज अपने दोस्त रमन और राजीव के तेवर कुछ अजीब से लग रहे थे। उनकी आँखों में मक्खारी सी दिख रही थी। उसको देखकर लगता था जैसे कोई बात अपने अंदर ही अंदर मुझसे छुपा रहे हों।
वो दोनों एक दूसरे को इशारे भी कर रहे थे जबकि बाकी सब लोग अपने अपने कामों में बीज़ी थे। लेकिन रमन और राजीव का व्यवहार और उनका ध्यान कहीं और था। मैंने उस पर नजर रखना शुरू कर दी लेकिन फिर मुझे प्रियंका ने अंदर बुलाया। वो मेरी सबसे पसंदीदा गर्लफ्रेंड थी।
उसने कभी भी मेरे सामने ऊंची आवाज में बात तक नहीं की थी। मेरी बहुत इज्जत भी करती थी, मैं उसके पास चला गया, वो मुझसे बातें करने लगी। बातों ही बातों में पता ही नहीं चला। कब रात के 12:00 बज गए थे, फिर हम सब लोग बैठकर एक बार फिर से शराब की महफिल सजाई थी।
लेकिन अब भी राजीव की आंखें कुछ और ही कह रही थी। वो शराब पीने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहा था। अब मुझे बेचैनी होने लगी थी कि तभी मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे ममता मुझे बुला रही है। मुझे कमरे के अंदर बुला रही थी।
कह रही थी सुबह की रौशनी फैलने वाली है। जाओ भगवान के पास जाओ और उससे अपने किए गए पापों की माफी मांगो और भगवान की आरती करो। इन लोगों को यहाँ से निकाल दो। ये लोग अच्छे नहीं हैं वरना बहुत बुरा होगा। मैं ये बात सुनकर हैरान रह गया था क्योंकि ममता तो
मेरे सामने ही अपनी माँ के घर गई थी। क्या वो वापस घर आ गई थी? मुझे बहुत गुस्सा आया, उसकी आवाज मेरे कानों से टकरा रही थी। ये मेरा कोई वहम नहीं हो सकता था। हालांकि घर में म्यूसिक की आवाज बहुत ऊंची थी लेकिन फिर भी मुझे विश्वास था कि उसी की आवाज है।
वो घर आ चुकी है। गुस्से से मैंने कमरे का दरवाजा खोला और कमरे को कुंडी भी लगा दी। लेकिन जैसे ही मैंने दरवाजे को कुंडी लगाई थी, बाहर से बहुत तेज आवाजें आने लगी थीं। आवाजें ऐसी थी जिन्हें सुनकर मेरा दिल बैठ गया था।
ये आवाज तो पिस्टल से निकलने वाली गोलियों की थी। मैं दिल थामे वहीं बेड पर बैठ गया था। डर के मारे मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से कांप रहा था। मैंने कांपते हाथों से अपना मोबाइल निकाला और उस पर नंबर डायल करने लगा। थोड़ी ही देर बाद मेरे दरवाजे को ज़ोर ज़ोर से पीटा जाने लगा।
लेकिन मैंने दरवाजा नहीं खोला था। जरूर मेरे घर में कुछ तो गड़बड़ हो रही थी जो ये फाइरिंग की आवाजें आ रही थी। थोड़ी ही देर बाद बाहर सब कुछ शांत हो गया था। पुलिस को मैं कॉल कर चुका था। थोड़ी ही देर में पुलिस के सायरन बजने लगे थे। मेरे कमरे के दरवाजे को।
लाख कोशिशों के बावजूद भी कोई तोड़ नहीं सका था क्योंकि मेरे कमरे का दरवाजा बहुत मजबूत था। अगर 100 आदमी मिलकर भी उस दरवाजे को तोड़ते तब भी तोड़ नहीं पाते। इसी कमरे में सारा जेवर और कीमती चीजें
कैश और हर तरह के कागजात रखे हुए थे, जबकि मेरा मोबाइल मैं अपने साथ ही लेकर कमरे में आया था। मेरे दोस्तों ने मुझसे ज्यादा शराब पिलाने की कोशिश की थी, मगर मैंने बहुत कम शराब पी थी जिसकी वजह से मैं अपने होश और हवास में था।
जब मुझे ममता की आवाज सुनाई दी थी तो मैं इसी कमरे में आया था, लेकिन अंदर कोई नहीं था। मैं यही सोच रहा था और उसी वक्त पुलिस आ गई और सारा ड्रामा खत्म हो गया। सब लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और मैंने अपने दोस्तों का नाम लिया था।
वह गरीब घर से थे, लेकिन बड़े ही मक्कार और चाल बाज निकले। वह आज मुझे मारने और मेरे घर पर डाका डालने के इरादे से आए थे। हकीकत सुनकर मुझे विश्वास नहीं आया था। मेरे अपने जिगरी दोस्त मेरे खिलाफ़ इतना बड़ा प्लान तैयार कर सकते थे।
उनको मेरी शादी के बारे में भी पता था और ये भी पता था कि मेरे कमरे में अच्छा खासा कीमती जेवर पड़ा है। वो लोग ये सब कुछ उठाकर और चोरी के इरादे से रखते थे, लेकिन समय पर पुलिस आ गई थी। अब सब लोग पकड़े गए थे।
लेकिन सबसे बड़ी बात ये थी जो मुझे हैरान और परेशान भी कर रही थी कि वो उस रात मेरी पत्नी घर पर नहीं थी। वो अगले दिन घर वापस आई थी लेकिन ये शायद उसकी भगवान से सच्ची भक्ति का असर था कि उसने मुझे बचा लिया था। भगवान अपने खास भक्तों पर।
आने वाली मुसीबत को आने से पहले ही टाल देते हैं। यही तो भगवान की लीला अपरंपार है। मैंने उसी दिन से अपने सारे बुरे कामों से तौबा कर लिया था और अपनी पत्नी ममता को दिल से अपना लिया था। उसके साथ अपनी सादेशुदा रिश्ते की भी शुरुआत की थी।
और आज मैं अपनी पत्नी के साथ बहुत खुश हूँ। मेरा एक बेटा भी है जिसकी परवरिश मेरी पत्नी बहुत ही अच्छे से कर रही है। मेरी पत्नी बहुत ही अच्छी साबित हुई थी मेरे लिए दोस्तों अगर आपको हमारी कहानी पसंद आई है तो कमेंट करके जरूर बताएं।
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