Short Story in Hindi : भाई बहेन की यह कहानी सुनकर आप भी हो जाओगे हैरान !

Short Story in Hindi

जब मैं 15 साल की थी और मेरा 19 साल का सौतेला भाई मेरे साथ ही सोता था और रोज़ रात को मुझे कोई चीज़ चुगती थी, उस वक्त में नादान थी, लेकिन 1 दिन में परेशान होकर उस चीज़ को पकड़ लिया तो मेरे भाई ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और मेरे साथ जो किया मेरी चीख निकल गई। मेरा नाम सिमरन है और मैं एक हॉस्पिटल में काम करती हूँ।

मैं अब 24 साल की हो चुकी हूँ और बचपन में हुए एक घटना से मेरी जिंदगी पूरी तरीके से बदल चुकी है। हॉस्पिटल में मेरी नाइट ड्यूटी लगी हुई है। मैं शाम 7:00 बजे काम पर आ जाती हूँ और सुबल की 7:00 बजे घर चली जाती हूँ। 1 दिन हॉस्पिटल में एक पेशेंट आया जिसकी देख रेख की जिम्मेदारी मुझे दी गई। जब मैं उस पेशेंट के पास गई तो उसे देखकर मेरी आंखें फटी की फटी रह गई।

डर के मारे वक्त मानो थम सा गया। मैं जल्दी से मांस पहन के अपना चेहरा छुपा लिया और यही उम्मीद कर रही थी कि वह पेशेंट मुझे पहचान ना पाए। ऐसे भी ये पेशेंट मुझे नहीं पहचान पाएगा क्योंकि वह मुझे तब पहचानता था जब मैं 15 साल की थी। एक नर्स ने बताया कि वह किसी के साथ मारपीट करते हुए घायल हुआ है।

और मैं मन ही मन यही दुआ मांगने लगी कि वह मर जाए, लेकिन किसी पेशेंट के लिए ऐसी दुआ नहीं मांगनी चाहिए जब वह सोता था। मुझे लगता था कोई ऐसा इन्जेक्शन दे दूं कि वह मर जाए लेकिन मैं ऐसा गंदा काम नहीं कर सकती थी। मेरी नौकरी चली जाएगी। वह पेशेंट जब थोड़ा ठीक हुआ तो मेरी तरफ अजीब नजरों से देखने लगा।

मैं अपना चेहरा और बाल छुपा कर रखती थी, पर वह मेरी आँखों में घूरता रहता था जैसे कि कुछ याद करने की कोशिश कर रहा है और मैं यही दुआ मानती कि वह मुझे पहचान ना पाए क्योंकि मेरी जिंदगी का दर्दनाक हादसा वही से शुरू हुआ था और उसके बाद में एक के बाद एक ठोकर एक हाथी रही।

कुछ दिनों में वह लड़का डिस्चार्ज हो गया। मैं भीश बदल कर उसका पीछा करने लगी। मैं उसके बारे में पता लगाना चाहती थी कि वह कहाँ रहता है और किसके साथ रहता है, क्योंकि वह लड़का कोई और नहीं बल्कि मेरा सौतेला भाई था। जब मैं 13 साल की थी तो मम्मी, पापा और मैं एक साथ सुखी परिवार थे, लेकिन तभी 1 दिन हमारे पड़ोस में उषा आंटी और उसका बेटा रहने आया।

उषा आंटी एक विधवा थी। वो अक्सर मेरे घर पर आ जाती थी और मेरी माँ से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई थी। लेकिन उस वक्त क्या पता था कि ये औरत और उसका बेटा हमारी जिंदगी पूरी तरीके से नर्क बना देंगे। 1 दिन मेरी माँ को बहुत बुखारा गया और वह बिस्तर पर पड़ गई। बहुत इलाज कराने के बाद भी समझ नहीं आ रहा था कि उन्हें क्या हुआ है?

मोहल्ला की एक औरत ने कहा कि जरूर यह होश आपको कुछ मिलाकर खिलाती है। वह अच्छी औरत नहीं है, उसको आपके पति के साथ कई बार बात करते हुए देखा है। एक विधवा औरत जात को परामर्श से आखिर क्या काम है? उषा आंटी तो अक्सर घर पर आती है और मम्मी को अक्सर खाना बनाकर खिलाया करती थी।

उस औरत की बात से मेरी माँ को शक होने लगा और उषा आंटी का घर पर आना जाना बंद कर दिया। उषा आंटी के हाथ से खाना खाना भी बंद कर दिया और उसके बाद मेरी माँ धीरे धीरे ठीक होने लगी। अब माँ को लगने लगा था की जरूर औरत में कुछ गड़बड़ है। कभी कभी उषा आंटी मुझे मिल जाती थी पर मैं उनसे दूर रहने की कोशिश करती थी क्योंकि क्या पता उनके दिल में क्या है?

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मैं भी कई बार बाहर पापा को और उसको बात करते हुए देखा था। मेरी मम्मी और पापा में भी अक्सर झगड़ा हो जाता था। मुझे समझ नहीं आता था कि दोनों में किस बात पे झगड़ा होता है क्योंकि मैं अपने कमरे में सोई थी और उनके कमरे से झगड़े की आवाज आती थी और 1 दिन मेरी मम्मी मर गई।

उस वक्त में सिर्फ 15 साल की थी। मेरी मम्मी की मौत मेरे लिए एक बहुत ही दर्दनाक हादसा था पर मुझे ये बात समझ नहीं आई थी कि आखिर उनकी मौत कैसे हुई क्योंकि मेरे पापा मुझे मेरी मम्मी के करीब नहीं जाने दिए थे। मैं बहुत रोई थी और रो रो के मेरा बहुत बुरा हाल हो गया था।

और कुछ ही दिनों में मेरे पापा ने उषा आंटी से शादी कर ली। वो और उनका बेटा पिंटू हमारे घर पर रहने आ गए थे। मुझे उषा आंटी बिल्कुल पसंद नहीं थी क्योंकि कहीं ना कहीं उसकी वजह से ही हमारे परिवार में इतनी मुसीबत आई थी। मेरे पापा और मेरी सौतेली माँ एक कमरे में सोते थे और मेरे कमरे में मेरे सौतेले भाई को सोने को कह दिया।

अब वह मेरे साथ सोने लगा था। मैं उस वक्त एक नादान बच्ची थी और मेरा भाई 119 साल का जवान लड़का मुझे बहुत ही अजीब सा लगता था उसके साथ सोने में, पर हमारे घर में और कमरा नहीं था। मजबूरी में मुझे उसके साथ सोना पड़ता था। कभी कभी उसकी हरकते देखकर मेरा दम घुटने लगता था। अजीब अजीब गन्दी हरकते करता था। मैंने कई बार कोशिश की अपने पापा को बताने की।

पर मेरे पापा उषा आंटी के प्यार में इस कदर पागल थी कि मेरी बातों पर ध्यान नहीं देते थे, लेकिन मैंने पापा से कहा कि पिंटू भैया ज़ोर ज़ोर से सांस लेते हैं। मुझे बहुत डर लगता है मुझे उनके साथ नहीं सोना तो मेरे पापा इस बात पर मुझे डांटते थे और मुझे मेरी मारी हुई मम्मी की याद आने लगती थी जो मुझे बहुत प्यार से रखती थी। उषा मम्मी तो बस मुझे डांटती, धमकाती रहती है।

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