Short Story in Hindi
मेरा नाम निशा है। मैं अपने पापा के साथ नाशिक में रहती थी। मेरे एक बड़े भैया थे। मेरी मम्मी इस दुनिया में नहीं थी। मेरे बड़े भैया 3 साल पहले मुंबई में नौकरी करने के लिए आए थे और यहीं पर भैया को एक लड़की पसंद आ गई थी, जिसके साथ उन्होंने शादी कर ली थी। मेरे पापा बहुत अच्छे थे। मुझे घर में सब लोग बहुत प्यार करते थे। मैं सबकी लाडली थी। पापा ने मम्मी के जाने के बाद हम दोनों भाई बहन को माँ और पिता दोनों का प्यार दिया था।
लेकिन पापा बीमार रहने लगे थे। वैसे तो इस घर में उनका ख्याल रखने वाले उनके माता पिता भी थे। मेरे दादा दादी मम्मी के जाने के बाद पापा ने दूसरी शादी नहीं की थी क्योंकि वो अपने बच्चों की जिंदगी किसी दूसरी औरत के आने के बाद खराब नहीं करना चाहते थे। उनको डर लगता था कि अगर उनकी पत्नी ने उनके दोनों बच्चों को एक्सेप्ट नहीं किया तो दोनों बच्चों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ सकता है। फिर हम लोग जवान हुए। भैया की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी, लेकिन उनकी पोस्टिंग मुंबई में हो गई थी।
भैया 4 साल से मुंबई में ही रह रहे थे। अब मेरा इंटर कंप्लीट हो चुका था। मुझे अब आगे पढ़ाई करनी थी इसलिए अब मुझे कॉलेज में अडमिशन लेना था। मैं तो चाहती थी कि मैं अब आगे ना पढूं, मगर मेरे पापा का कहना था कि वो मुझे किसी काबिल बनाना चाहते हैं। भैया ने दो महीने पहले अपनी शादी कर ली थी। उन्होंने इस बारे में हमें नहीं बताया था कि वो शादी कर रहे हैं। शादी करने के बाद जब हमें पता चला तो भैया की इस हरकत पर पापा बहुत नाराज़ हुए थे और इस दौरान उन दोनों .
भी बंद हो गयी थी। आख़िरकार भैया पापा के इकलौते बेटे थे। पापा चाहते थे कि वो भैया की शादी खूब धूम धाम से करे। लेकिन जब पापा को ये बात पता चली कि भैया ने अपनी मर्जी के मुताबिक शादी भी कर ली है तो ये सब सुनकर सब लोगों को गुस्सा तो बहुत आया था लेकिन उन लोगों की शादी हो चुकी थी। अब कुछ नहीं किया जा सकता था। इसलिए दादा दादी ने पापा को बहुत समझाया था कि आजकल के बच्चे हैं, अपनी मर्जी चलाते हैं। अगर तुमने बेटे पर ज्यादा गुस्सा किया तो वो कोई ग़लत .
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न उठा ले। पापा भी उन दिनों बहुत गुस्से में थे। दादा दादी ने उनको समझा बुझाकर शांत कर दिया था। मगर पापा ने भैया से बातचीत करनी बंद कर दी थी। वो भैया से कोई बात नहीं करते थे, लेकिन भैया से मेरी और दादा दादी की बातें हुआ करती थी। मैंने भैया को बताया था कि अब मेरा इंटर कम्प्लीट हो गया। मुझे कॉलेज में एडमिशन लेना है। भैया मुझसे कहने लगे कि कोलकाता में तो कुछ नहीं रखा, तुम यहाँ मुंबई आ जाओ। यहाँ पर काफी सारी ऐसी यूनिवर्सिटी है जहाँ पर पढ़ने से.
से काबिल बन जाउंगी। भैया की बात मेरे दिमाग में अच्छी तरह से बैठ गई थी। वैसे भी मैं भैया से मिलना चाहती थी। भैया को यहाँ से गए हुए कितना समय हो गया था? मेरी आँखें अपने भैया को देखने के लिए तरस रही थी और फिर मैं उनकी पत्नी से भी मिलना चाहती थी। भैया ने मुझे अपनी पत्नी का फोटो सेंड कर दिया था। वो बहुत सुंदर थी तभी से ही मैं भाभी से मिलने के लिए एक्साइटेड हो रही थी। मुझे पता था कि अगर मैं पापा से भैया के पास जाने की बात करूँगी तो पापा मुझ पर बहुत उत्साह करेंगे।
इसलिए मैंने। मैं दादा दादी से बात की थी और उनसे कहा था कि मैं भैया के पास जाना चाहती हूँ, मैं वहीं रहूंगी और वहीं पर अपनी पढ़ाई पूरी करूँगी। जब मेरी पढ़ाई पूरी हो जाएगी तो मैं यहाँ वापस आ जाउंगी। वैसे भी मुझे अपने भैया से दूर रहते हुए काफी समय हो गया। मैं कुछ साल उनके साथ बिताना चाहती हूँ। मेरे दादा दादी को भी ये आइडिया बुरा नहीं लगा था। दादा जी ने पापा से बात करने की कोशिश की थी। उन्होंने पापा से कहा था कि इशानी कॉलेज में एडमिशन लेना चाहती है। यहाँ कोलकाता में तो कुछ
नहीं रखा। हम चाहते हैं कि इशानी मुंबई चली जाए। पापा दादाजी से चौंकते हुए कहने लगे कि मुंबई में क्या रखा है? दादाजी ने उन्हें बताया कि मुंबई में बहुत बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटी है। वहाँ पर हमारी इशानी पड़ेगी और किसी काबिल बन जाएगी। पापा कहने लगे कि मैं अपनी बेटी को खुद से दूर नहीं करूँगा। आजकल का ज़माना बहुत खराब है। मैं अपनी बेटी को हॉस्टल में नहीं रहने देना चाहता। मुंबई में अगर हमारा कोई रिश्तेदार होता तो हमारी बेटी वहाँ पर ठहर जाती।
पापा की बात पर दादाजी ने कहा था कि रिश्तेदार की हमें क्या जरूरत जबकि हमारा वहाँ अपना ही बेटा मौजूद है। पापा समझ गए थे कि दादाजी क्या कहना चाह रहे हैं। पापा को गुस्सा आ गया और पापा कहने लगे कि आप क्या चाहते हो कि मैं अपनी बेटी को अपने उस बेटे के पास भेज दूं जिसने हम सब लोगों को अपनी शादी में भी शामिल करना ठीक नहीं समझा। दादा जी ने उनको समझाया कि वो बच्चा है, उससे गलती हो गई। मगर इशानी उसकी बहन है और वो कितने समय से अपने भाई से मिलने के लिए तड़प रही है?
सूरज ने खुद उसे मुंबई आने के ऑफर दी है। इसलिए मैं तुमसे बात कर रहा हूँ। पापा कहने लगे अच्छा तो उसे आप अपनी बहन की याद आ गई। दादा जी ने कहा कि बेटा ऐसे कोई बात नहीं है। उसे हम सबकी याद आती है। वो हमसे बार बार कहता है कि पापा मुझे माफ़ कर दे लेकिन तुम तो उसे माफी नहीं करते। गलती सबसे होती है अच्छा तुम उसे माफ़ मत करो लेकिन निशानी अपने भाई से मिलना चाहती है और उसका कहना है कि वो मुंबई में ही पढ़ाई करेगी और कुछ साल अपने भाई के पास रहेंगी।
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