Best Short Story In Hindi देवर और भाभी यह कहानी सुनकर आप भी हो जाओगे हैरान ! 2024

Best Short Story In Hindi

मेरी शादी वाले दिन मेरा 12 साल का देवर बहुत खुश था। मैंने हमेशा उसे अपना छोटा भाई समझा था और वह भी मुझे भाभी माँ कहकर पुकारना था। पति के मौत होने से कुछ दिन बाद मुझे अकेले सोने में डर लगता तो मैं अपने देवर को अपने साथ बेड पर सुलाने लगी। सर्दियों की रात थी और एक बिस्तर में मुझे देवर के साथ सोना बहुत अजीब सा लगता था। देवर मुझसे काफी छोटा था। वो 12 साल की उम्र में भी 18 साल का जवान लड़का लगता था। पति के मौत के बाद मेरे बहुत मुश्किल से ही गुज़ारा किया था।

लेकिन कब तक में इस तरह गुज़ारा करती उस रात? सोचा कि एक बार देवर को आजम के देखती हूँ। आंधी रात हुई तो देवर को हिलाकर देखा तब गहरी नींद में था, लेकिन वह हाथ लगाते ही मेरी आँखें हैरत से फटी की फटी रह गई क्योंकि मेरा देवर का साथ इंच 2 दिन पहले ही मेरा पति इस दुनिया से चला गया था। मेरे घर में मेरे सास, ससुर और नंदे भी नहीं थी। मेरे पति का इस दुनिया में अपने छोटे भाई के अलावा और कोई नहीं था।

समीर की उम्र 12 साल की थी। वह मुझसे छोटा था। जिंदगी में मैंने कभी उसे छोटे भाई से ज्यादा कुछ नहीं समझा था। मेरा देवर 12 साल का था, मैंने उसे हमेशा ही बच्चों की तरह समझा था। जब मेरी शादी हुई थी तो वह मेरी शादी वाले दिन ही बहुत खुश था। कहता था कि मुझे नई माँ मिल गई है लेकिन मेरी माँ मुझे यही समझाती रहती थी।

बेटा तुम्हारा देवर तुम्हारा बेटा नहीं है, इससे फासले पर रहना, थोड़े अरसे के बाद वह बड़ा हो जायेगा, फिर उसका और तुम्हारा पर्दा लाजिम होगा। इसलिए तुम अब इसे इसे आदत डालो की वह तुम्हारे कमरे में बिना रोक टोकना आया करे। मैंने बहुत बार देखा है की तुम्हारा देवर बिना वजह मुँह उठाए तुम्हारे कमरे में आता जाता है। बेटी तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए। तुम एक शादीशुदा लड़की हो, तुम्हे अपनी पति की भी परवाह करनी है और

निगर वालो की भी। मैं अपनी माँ की बातें सुनती तो मुझे ऐसा लगता जमीर के बारे में मेरी माँ बहुत बुरा सोचती है इसलिए मैं उनके बातों पर खापा होती थी लेकिन जब आज मैं बेचारा हो गई, मेरा पति इस दुनिया से चला गया था तो मेरी आँखों में आज सुबह रहे थे। मैं सोच भी नहीं सकती थी कि वह मुझे अपने 12 साल के भाई के ऊपर छोड़कर इस दुनिया से चला जाएगा।

मेरी जिंदगी मुश्किल में पड़ गई थी, रो रो कर मेरा बुरा हाल था। रात के 12:00 बज गए थे मेरा देवर समीर अभी तक घर नहीं आया था, वह शायद अपने भाई के रिश्तेदारों के साथ मशरुम था। मेरा दिल मुतमई से हवाले से था कि चलो वह घर नहीं आता तो ज्यादा अच्छी बात है क्योंकि अगर वह घर आ गया तो मुझे भी गैर महसूस होगा। मुझे रह रह कर अपनी माँ की बातें याद आ रही थीं लेकिन इस लम्बे घर के दरवाजे पर दस्तक हुई। मेरा दिल उछलकर हलक में आ गया। मैंने सोचा कि पता नहीं कौन होगा मगर बाहर से समीर की आवाज़ आई भाभी दरवाजा खोले हूँ।

मैं नहीं डरते डरते ही दरवाजा खोला था। आज तो मुझे यह घर जंगल जैसे मालूम हो रहा था। समीर मुझे छोटा सा भेड़िया लग रहा था। पता नहीं क्यों मैं उसके बारे में इतना बुरा सोचने लगी थी। भाभी अपने खाना खाया उसने मुझे मासूमियत से पूछा नजरें झुकी हुई थी और साथ ही ये हाथ में एक थैली रखी हुई थी। थैली में चावल थे, चावल होटल वाले लगते थे उसने।

एक प्लेट में चावल डाले और मेरे सामने लाकर रख दिए। भाभी मुझे खाना बनाना नहीं आता मैं आपके लिए बाहर से लेकर आया हूँ, आप खा लें वरना यूँ ही भूखी मर जाएगी।

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मैं अपने भाई के बाद अपनी माँ को नहीं खोना चाहता। समीर की आँखों में भी आंसू थे। कहने को तो वह मुझे माही कह रहा था मगर फिर भी माँ की बातें मेरे जहन से नहीं निकल रही थी। भाभी आपको फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं आपका सहारा बनूँगा, आप इस घर से कभी मत जाना। वह बड़ी जज्बाती बातें कर रहा था लेकिन मेरे जहन में बहुत सारे अंदेशे मटक रहे थे।

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फिर उसने अजीब बात बोली भाभी आप इस कमरे में सो जाए। दूसरा कमरा तो छत के करीब है। मुझे ऐसा लगता है कि आपको छत वाले कमरे के पास नहीं होना चाहिए और अब तो सब लोगों को पता है कि हमारे घर में भाई की मौत हो गई है तो कोई भी बुरी नीयत से हमारे घर आ सकता है। मैं हैरान थी कि समेत इतनी छोटी उम्र में ऐसी बातें क्यों कर रहा है?

क्या उसे? किसी ने कुछ कहा है, मगर जो बातें उसने की थी मुझे ठीक ही लगी थी।

में उसके कमरे में चली गई समीर का कमरा दूसरी तरफ था जब की मैं और मेरा पति छत के करीब वाले कमरे में रहते थे। मुझे बहुत अजीब लग रहा था। आज पहली बार में अपने कमरे के अलावा दूसरे के कमरे में आई थी, मगर जो कुछ मैंने अपने देवर के कमरे में देखा, मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गई थी। कमरे का दरवाजा बंद करते ही मेरी नजर ऐसी चीज़ पर पड़ी थी जिसने मेरे होश उड़ा दिए थे।

वैसे तो वह 12 साल का बच्चा ही लगता था, लेकिन मेरी माँ की बात सही थी।

समीर जो कुछ कह रहा था, वह एक बड़ा और एक समझदार आदमी ही कर सकता है। समीर के कमरे में मैं अपना जेवर देखकर मेरा दिल खोल उठा था। मैंने तो उसे कई जगह पर कई तालों में छुपा रखा था मगर यह सब कुछ समीर हाथ कैसे लग गया? बात बड़ी अजीब सी थी। मैं दिल में सोचने लगी कि मैं सुबह होते ही इसे इस बात का सवाल करूँगी, मगर उस वक्त मुझे सख्त नींद आ रही थी।

यह सब कुछ समीर खान कैसे लग गया? बात बड़ी अजीब सी थी। मैं दिल में सोचने लगी कि मैं सुबह होते ही इसे इस बात का सवाल करूँगी, मगर उस वक्त मुझे सख्त नींद आ रही थी। मैंने दरवाजे को अंदर से कुंडी लगाकर अच्छी तरह लॉक कर लिया और फिर सोने की तैयारी करने लगी। पता नहीं क्यों मुझे बहुत नींद आ रही थी। हालांकि ये 2 दिन से मुझे ज्यादा नींद नहीं आ रही थी।

पर आज मुझे लग रहा था जैसे समीर के लाए हुए चावल खाकर मेरी आँखों पर नींद की तारीख हो रही थी। दिल में सोचा कि कहीं चावल खाने से मुझे नींद तो नहीं आ रही मगर इतना तो मुझे मौका ही नहीं मिला। जब मेरी आँख खुली तो सुबह के 10:00 बज रहे थे। मैं हैरान हो रही थी कि आज मुझे इतनी नींद कैसे आ गई? हालांकि 2 दिन से मुझे बिल्कुल नींद नहीं आ रही थी, लेकिन आज चावल खाने के बाद मेरी आँखें ऐसी बंद हुई जैसे किसी को शराब पीला दी गई हो। मैं हैरान हो रही थी।

ऐसा होना तो नहीं चाहिए? मेरे दिल में ये बार बार एक ही ख्याल आ रहा था। कहीं से मिर्केल आए हुए चावलों को खाकर मैं बेहोस्त नहीं हो गई, लेकिन आखिर से मेरे ऐसा क्यों करता? मैंने दिल में सोचा आँखे मल्टी हुई। मैं बाहर आई तो सामने समीर किचन में चाय बना रहा था। उसे देखकर मुझे बहुत बुरा लग रहा था। भाभी आप सो गई थी आपको बहुत अच्छी नींद आई ना उसने?

मेरी तरफ पुकारते हुए देख कर कहा था, मैंने उसे में यही कहा, हाँ, आज मुझे बहुत ज्यादा नींद आई तो क्यों नहीं आती भाभी? मैंने आपको चावलों में नींद वाली गोली मिलाके दी थी। मैंने अपने दोस्त को बताया था की मेरी भाभी को नींद नहीं आती।

उसने मुझे कहा तुम इन्हें खाने में इन की गोलियां मिला दिया करो, इससे वह आराम से सो जाएगी। मैं हैरान हो गई थी कि समेत इतनी घटिया हरकत कैसे कर सकता है? समीर तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो? तुम अपनी भाभी को बेहोश करना चाहते थे?

नहीं नहीं भाभी, मैं तो आपको अच्छी नींद देना चाहता था। अब आप अच्छी खासी तरोताजा लग रही है। यह ले चाय पिए। उसने चाय मेरे सामने रखी तो मैं शक में पड़ गई तुमने। इसमें भी कुछ मिलाया तो नहीं है।

भगवान की कसम भाभी वह तो मैंने आपकी नींद के लिए आपके सुकून के लिए गोलियां मिलायी थी।

आपको शक है तो ये चाय में आपके सामने खुद पी लेता हूँ बल्कि हम आंधी आंधी पी लेते हैं। उसने इस गिलास के घुट भरते हुए मुझे दिखाया तो मैं यकीन कर बैठी। मैंने कहा कि ठीक है मुझे माफ़ कर दो, मैं तुम्हारे बारे में ये शक्की हो जाती हूँ। मैं समीर का चेहरा देखती तो उसकी मासूमियत पर मुझे यकीन आ जाता था क्योंकि वाकई उसके चेहरे पर बहुत ज्यादा मासूमियत और शराफत थी। मैंने। आज उसे कुछ नहीं कहा था।

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जानना चाहती थी कि।वह आगे खुद से क्या कहेगा? क्योंकि जो कुछ में उसके कमरे में देख आई थी, उसकी तो कोई माफी नहीं थी। थोड़ी देर बाद उसने खुद ही मुँह खोल लिया। भाभी मैं आपके जेवर बेचना चाहता हूँ, मेरा एक बहुत ही जानने वाला और ईमानदार अंकल है। वह हमारे जेवर बेचकर हमें बहुत सारे पैसे देंगे। हम उन पैसों से ये मकान खरीद लेंगे। इसकी राय के मकान में हम कब तक रहेंगे?mमालिक मकान तो परसों किराया लेने आ जाएगा। हमारे पास तो पैसे ही नहीं हैं।

समीर की बात सुनकर मैं हैरान हो गई थी। अभी तक ऐसा तो मैंने सोचा भी नहीं था, फिर वह कैसे सोच सकता था? बात बड़ी अजीब थी, मैंने कहा, समीर तुम्हें यह ख्याल कैसे आया कि हम एक नया घर बनाए? भाभी मुझे आगे शादी भी करनी है। हमें सारी जिंदगी एक साथ रहना है। हमारे पास एक नया घर होना चाहिए और किराये के घरों में तो सिर्फ इंसान जलील और रूसवा होता है।

समीर की बात ठीक थी इसलिए मैंने उसे जेवर वाले मामले में कुछ नहीं कहा, लेकिन मुझे डर था कि वो वह जेवर बेचकर हमारे पास अगर पैसे ना आए तो क्या होगा? मैं एक बेवा औरत थी। मेरा देवर 12 साल का था तो ऐसे में ये कोई भी हमें आराम से आसानी से धोखा दे सकता था। मैंने।

इस बारे में मैं किसी से मशवरा कर लूँ। मैं अपने मायके वाले से कहती हूँ, वह मेरी मदद जरूर करेंगे। समीर तो छोटा बच्चा था, जब की इस बात पर मुझे अभी तक गुस्सा था कि उसने मेरे कमरे से आखिर इतने ताले तोड़ कर वह जेवर निकाला कैसे? जब की ताला टूटे हुए भी नहीं थे इस जेवर के बारे में मैंने समीर को बताया भी नहीं था। मुझे अब समीर पर गुस्सा आ रहा था।

लेकिन वो जो भी करता आखिर में उसकी ऐसी हताहत करता की मैं मुतमयिन हो जाती। मैंने अपने माइक वालो से कहा की मुझे यह जेवर बेचकर घर खरीदना है, उन्होंने मुझसे कहा नहीं घर लेने की जरूरत नहीं है, तुम अब बेवा हो चुकी हो, तुम्हे अब हमारे घर आना होगा पर मैं उनके घर नहीं जा सकती थी। मैं जानती थी कि मेरे भाई अपनी बीवियों के गुलाम हैं। वह अपनी बेव बहन को कभी भी सहारा नहीं देंगे। जिंदगी भर इंसान उनके सहारे नहीं रह सकता।

अभी अच्छा मौका था, मैं अपना जेवर बेचकर एक घर खरीद सकती थी।

मेरे पति ने अपनी जिंदगी में मेरे लिए काफी सारा जेवर बनाया था, मगर अपने भाइयों की नियत देख कर मैंने वहाँ जेवथ देने का इरादा तय कर दिया। अब मैं समीर के सहारे ही चल रही थी। मैंने कहा समीर तुम चाहे तो वह जेवर बेच दो। मैं अपनी माइक्रो वालों से और उनके रवैये से मायूस हो गई। समीर ने अपनी उन्हीं अंकल को वह जेवर जाकर दे दिया और 2 दिन के बाद हमें एक बहुत मुनासिब जगह पर

घर ढूंढकर घर की चाबी और घर के कागजात उन्होंने समीर के हवाले कर दिए। मैं तो इस सारे अमल पर हैरान रह गई कि 2 दिन में इतनी जल्दी यह घर हमें कैसे मिल सकता है, जबकि लोगों को काफी सारा काम भी करना पड़ता है। घर का इंतकाल घर के कागजात बहुत सारी ऐसी चीजें होती है जिन पर इंसान को मेहनत करनी पड़ती है। वक्त लगाना पड़ता है। जब समीर ने कागजात लाकर मेरे हाथ में रखे तो मैं हैरान रह गई थी। वह तो 12 साल का मगर उसकी सोच बड़ों वाली थी।

फिर उसने अजीब सी बात कही। कहने लगा की भाभी हम सारा घर साफ कर लेंगे तो आपसे जरूरी बात करनी है। आज समीर की आँखे तो अजीब सी लग रही थी, उसकी नजरों में कोई अजीब सी बेचैनी थी जिसे देख कर मैं समझ नहीं पा रही थी की वह मुझसे क्या कहना चाहता है। उस वक्त में जल्दी में थी, हमने घर में सारा सामान भर दिया था। अब हमें आगे की फ़िक्र थी कि हमारा खाना पीना और राशन कहाँ से होगा?

जब की मैंने तो कभी ज़िन्दगी में बाहर जाकर कोई नौकरी भी नहीं की थी, फिर समीर यह क्यों कह रहा था कि उसे मुझे कोई जरूरी बात करनी है? पता नहीं उसे मुझे क्या बात करनी होगी? मेरे जहन में बहुत सारे सवाल थे पर मैं फिलहाल चुप रहना चाहती थी। शाम को मैंने सारा सामान अपनी जगह पर रख दिया था। वैसे भी हमारा सामान कम ही था। ज्यादा माल और दौलत तो नहीं थी जिसे हम लिए फिरते।

मैंने सारा काम करने के बाद अच्छा सा खाना बनाया। मैं समीर का इंतज़ार कर रही थी क्योंकि।

वह इस घर का हिस्सा था और मैं नहीं चाहती थी कि वह बाहर जाकर गंदा खाना खाये। मैंने उसके लिए खाना बहुत मेहनत से बनाया था।

बिलकुल वैसे ही जैसे अपने पति के पसंद से पहले बनाया करती थी। हर किस्म के लाड़ प्यार और नखरे उठाती थी। बहुत सारा खाना बनाने के बाद मैंने टेबल पर रख दिया और समीर के आने का इंतजार करने लगी। मगर आज वह घर नहीं आया। मुझे बहुत अजीब सा लगा। उसे इस वक्त घर होना चाहिए था जब की रात के 10:00 बज गए थे। भाई के मौत से पहले तो वह शाम को तकरीबन 5:00 बजे घर आ जाता था और उसके बाद कभी घर से बाहर नहीं निकलता।

हम लोग जब बाहर आइसक्रीम खाने जाते तो वह हमारे साथ जरूर जाता, लेकिन अकेला तो कभी घर से बाहर नहीं गया। मुझे डर लग रहा था, मैं उसका इंतजार करने लगी। यहाँ तक कि यह रात के 12:00 बज गए बजे उसने दरवाज़े पर दस्तक दी। मैंने गुस्से से दरवाजा खोला, उस पर बरस पड़ी, कहा रह गए थे तुमसे मीर तुम्हें शर्म नहीं आती मैं तुम्हारी बेवा भाभी तुम्हारा इंतजार कर रही थी मैंने तुम्हारे लिए खाना बनाया और तुम हो कि अपने भाई के जाते ही आवारा गर्दिया करने लगे।

आखिर ऐसी कौन सी बात है जो तुम घर में नहीं कर सकते? तुम्हें बाहर जाना पड़ता है, तुम्हारे दोस्त को इधर ही बुला लिया करो भाभी मैं ऐसा नहीं कर सकता। उसने नजर उठाकर मुझे ऐसे गुस्से से देखा कि मैं डर गई थी मगर वह तो एक बच्चा ही था। मैंने दिल में सोचा मैं इसे डरा धमका तो शक्ति हूँ। मैं यही ख्याल करके उससे बात कर रही थी कि वह मुझ पर चिल्ला उठा।

भाभी बस कर दे मुझे अब आपकी कोई बात नहीं सुननी और जो अपने खाना पकाया है वह आप खुद खा ले। यह कह कर वह अपने कमरे की तरफ चल गया।

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