Short Story In Hindi
मेरा बेटा नशा करता था। एक रात वो एक लड़की को अपने साथ घर लेकर आया। मैं उस लड़की को यहाँ से भेजने लगी तो बेटा उसे छोड़कर मुझे कमरे में ले गया और कुंडली लगाकर मेरे सारे साथ पति चाहे जैसा भी हो, बीवी के सर पर बहुत बड़ा साया होता है। जब वो ना रहे तो औरत की जिंदगी जीते जी नरक बन जाती है।
लेकिन मैं वह बदनसीब हूँ कि मेरी जिंदगी बर्बाद करने वाला कोई और नहीं मेरा ही बेटा है मैं वो अंधेरी रात कैसे भूल सकती हूँ जिसकी स्याही ने मेरी सारी जिंदगी बर्बाद कर दी। शालीन मेरा 20 साल का सौतेला बेटा था। घर का अकेला ही।
कमाने वाला था और मेरे पति के देहांत को बस कुछ ही महीने गुजरे थे कि वह एक रात एक लड़की को अपने साथ लेकर आया और कहने लगा कि मुझे इससे शादी करनी है लेकिन मैंने इनकार कर दिया। वजह ही ऐसी थी मैं कभी भी शालीन की शादी उस लड़की से नहीं कर सकती थी लेकिन मेरा इंकार करना था कि शालीन आपे से बाहर हो गया। उसने उस लड़की को तो यहाँ से जाने दिया।
लेकिन मेरा हाथ पकड़ कर वह मुझे जबरदस्ती खींचता हुआ कमरे में ले गया। मेरी जान उस वक्त फना हुई जब उसने मुझे बेड पर पटका और कमरे की कुंडी लगाई। कहने लगा आज तुम्हारे इन्कार की।
तुम्हें वो सजा दूंगा की दुनिया वालों के सामने मुँह छिपती फिरोगी उसकी बात का मतलब समझ कर मेरा बुरा हाल हो गया था। मैंने कहा शर्म करो मैं तुम्हारी माँ हूँ लेकिन उसने मेरी बात नहीं मानी और फिर मेरे साथ वो मंजर सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। शालीन मेरे पति की इकलौती औलाद थी, इसलिए मेरे पति ने उसके अब तक सारे लाड़ उठाए थे। इसीलिए खुद गरजी और बदतमीजी उसके रग रग में भरी थी।
मुझसे कभी भी अच्छे से बात नहीं करता था। बचपन से ही मेरा पति उसे सीखाता आया की शालीन, तुम मेरी सारी जायदाद के अकेले वारिस हो कच्चे।
दिमाग में बार बार सुनता है तो खुद ब खुद ही उसके अंदर यह सारी बातें खुदगर्जी के तौर पर आ जाती है। शालीन के साथ भी कुछ ऐसा ही मसला था। वह पूरे घर में यूं रहता है जैसे वह मालिक है और मैं उसकी नौकरानी। मुझे नहीं याद कि उसने कभी मुझे माँ कहा हो। मेरा नाम सोनम है और वह मुझे सोनम ही कह कर बोलाता था। पहले पहले जब उसने मुझे यह कहकर पुकारा तो मुझे लगा शायद मेरे पति मुझे इसी नाम से पुकारता है।
तो इसीलिए शालीन की जुबान पर भी यही चढ़ गया है। लेकिन मैंने फौरन उसे टोक दिया की बेटा मैं तुम्हारी माँ हूँ, मुझे माँ कहा।
करो, लेकिन वह 5 साल की उम्र में भी बहुत ही बदतमीज़ किस्म का था। कहने लगा नहीं, मैं तो तुम्हें सोनम ही कहकर पुकारूंगा मुझे इसका लहजा बहुत बुरा और बदतमीज़ सा लगा। मैंने एक थप्पड़ उसके मुँह पर मार दिया, लेकिन मैं नहीं जानती थी कि यह थप्पड़ मुझे इस कदर महंगा पड़ जाएगा। मेरे पति उस वक्त ऑफिस के लिए तैयार हो रहे थे।
और शालीन स्कूल के लिए तैयार हो चुका था। मैं उसे नाश्ता बनाकर देने लगी तो कहने लगा सोनम मुझे तुम्हारे हाथ का नाश्ता नहीं पसंद। उसकी इस बदतमीजी पर मुझे गुस्सा आ गया। मैंने कहा मुझे माँ कहाँ करूँ मैं माँ?
वो तुम्हारी वो कहने लगा तुम सोनम हो और मैं तुम्हें हमेशा सोनम ही कहकर पुकारूंगा मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया, मैंने उसके मुँह पर थप्पड़ मार दिए लेकिन मैं नहीं जानती थी कि इसका अंजाम मुझे तड़पा के रख देगा। वह रोने लगा। उसी वक्त मेरा पति कमरे से बाहर निकला और शालीन से रोने की वजह पूछने लगा।
ने मेरी तरफ इशारा किया और कहने लगा इस औरत ने मुझे थप्पड़ मारा है। मैंने कहा कि मुझसे बदतमीजी से बात कर रहा था। मुझे माँ के बजाय सोनम कह रहा था। मेरी बात मेरे पति ने पूरी सुनी भी नहीं थी कि एक जोरदार थप्पड़ मेरे।
मुँह पर मार दिया। कहने लगा तुम होती कौन हो मेरे बेटे पर हाथ उठाने वाली तुझे तो मैं बताता हूँ की मेरे बेटे पर हाथ उठाने का अंजाम क्या होता है? वह मेरा हाथ पकड़े मुझे रूम में ले गया और बहुत बुरी तरह मारने लगा। मैं चीखने लगी, चिल्लाने लगी लेकिन मेरे पति को मुझ पर तरस ना आया। शालीन यह सब देखकर हंसते हुए तालियां जा रहा था। मेरे पति ने कहा खबरदार दोबारा शालीन पर हाथ उठाया तो
मुझे नहीं पता था कि मेरा पति ऐसी हरकत भी मेरे कर सकता है, वह भी एक बच्चे के लिए अपनी बीवी को बच्चों के सामने अहमियत नहीं देगा। मैं रोती।
बिलखती अपने कमरे में चली गई। वक्त इसी तरह गुजरता चला गया और अब शालीन 8 साल का हो गया था और उसकी खुदगर्ज़ी और भी परवान चढ़ गई थी। वह स्कूल से आता तो मैं खाना तैयार करके रख देती थी क्योंकि अगर ज़रा भी देर हो जाती तो वह तूफान खड़ा कर देता था। लेकिन आज सुबह से ही मुझे बुखार था। मुझसे कोई भी काम नहीं हो रहा था। खाना भी नहीं पका सकी थी। कल की सब्जी मौजूद थी। मैंने सोचा कि वही आज शालीन को दे दूंगी।
शालीन जब स्कूल से वापस आया तो मैं बड़ी मुश्किल से ही उसके लिए रोटी बनाई थी। वह सीधा किचन में आया और कहने लगा, सोनम।
रोटी नहीं बनाई। क्या अभी तक ना जाने तुम क्यों इतनी सुस्त और काम चोर हो? मैंने कहा मुझे सुबह से बुखार है, मैंने खाना टेबल पर रख दिया है, लेकिन कल वाली सब्जी देख कर उसने खान की प्लेट पकड़ी और ज़ोर से फर्श पर फेंक दी और कहा तुम मुझे बासी खाना खिलाकर बीमार करना।
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