Short Story In Hindi दिल छू लेने वाली कहानी। Suvichar Hindi Stories Emotional Story !

Short Story In Hindi

1 दिन एक बुजुर्ग डाकिए ने घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा चिट्ठी ले लीजिए। आवाज सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी, अभी आ रही हूँ, ठहरो लेकिन लगभग 5 मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिए ने फिर कहा अरे भाई कोई है क्या? अपनी चिट्ठी ले लो।

मुझे और बहुत जगह जाना है। मैं ज्यादा देर इंतजार नहीं कर सकता। लड़की की फिर आवाज आई डाकिया चाचा अगर आपको जल्दी है तो दरवाजे के नीचे से चिट्टी अंदर डाल दीजिए। मैं आ रही हूँ कुछ देर और लगेगा। अब बूढ़े डाकिये ने झल्ला कर कहा।

नहीं, मैं खड़ा हूँ, रजिस्टर्ड चिट्ठी है। किसी का हस्ताक्षर भी चाहिए। तकरीबन 10 मिनट बाद दरवाजा खुला। डाकिया इस देरी के लिए खूब झल्लाया हुआ तो था ही, अब उस लड़की पर चिल्लाने ही वाला था लेकिन दरवाजा खुलते ही वह चौंक गया और उसकी आँखे खुली की खुली रह गई।

उसका सारा गुस्सा पल भर में फुर हो गया। उसके सामने एक नन्ही सी अपाहिज कन्या खड़ी थी, जिसका एक पैर नहीं था। लड़की ने बेहद मासूमियत से डाकिए की तरफ अपना हाथ बढ़ाया और कहा दो मेरी चिट्ठी।

डाकिया चुप चाप डाक देकर और उसके हस्ताक्षर लेकर वहाँ से चला गया। वो अपाहिज लड़की अक्सर अपने घर में अकेली ही रहती थी। उसकी माँ इस दुनिया में नहीं थी और पिता कहीं बाहर नौकरी के सिलसिले में आते जाते रहते थे। उस लड़की की देखभाल के लिए एक काम वाली बाई।

Short Story In Hindi मैं रात को सो रही थी कि अचानक मुझे एहसास हुआ कि कोई मुझे मैं उनको पीछे से….!

सुबह शाम उसके साथ घर में रहती थी, लेकिन परिस्थितिवश दिन के समय वह अपने घर में बिलुल अकेली ही रहती थी। समय निकलता गया महीने दो महीने में जब कभी उस लड़की के लिए कोई डाक आती, डाकिया एक आवाज देता और जब तक वह लड़की दरवाजे तक न आती।

तब तक इत्मीनान से डाकिया दरवाजे पर खड़ा रहता। धीरे धीरे दिनों के बीच मेलजोल और भावनात्मक लगाव बढ़ता गया। 1 दिन उस लड़की ने बहुत गौर से डाकिया को देखा तो उसने पाया कि डाकिया के पैर में जूते नहीं हैं। वह हमेशा नंगे पैर ही डाक देने आता था।

बरसात का मौसम आया, फिर 1 दिन जब डाकिया डाक देकर चला गया तब उस लड़की ने जहाँ गीली मिट्टी में डाकिये के पांव के निशान बने थे उन पर कागज रखकर उन पांव का चित्र उतार लिया। अगले दिन उसने अपने यहाँ काम करने वाली बाई से उस नाव के जूते मंगवाकर घर में रख लिए।

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दीपावली आने वाली थी। उससे पहले डाकिये ने मोहल्ले के सब लोगों से त्यौहार पर बक्शीस चाही। लेकिन छोटी लड़की के बारे में उसने सोचा बच्ची से क्या उपहार मांगना पर गली में आया हूँ तो उससे मिल ही लूँ। साथ ही साथ डाकिया ये भी सोचने लगा।

कि त्यौहार के समय छोटी बच्ची से खाली हाथ मिलना ठीक नहीं रहेगा। वह सोच विचार कर उसने लड़की के लिए ₹5 की चॉकलेट ले ली। उसके बाद उसने लड़की के घर का दरवाजा खटखटाया। अंदर से आवाज आई कौन मैं हूँ गुड़िया तुम्हारा डाकिया चाचा?

लड़की ने आकर दरवाजा खोला तो बूढ़े डाकिए ने उसे चॉकलेट थमा दी और कहा ले बेटी अपने गरीब चाचा की तरफ से लड़की बहुत खुश हो गई और उसने कुछ देर डाकिए को वहीं इंतजार करने के लिए कहा। उसके बाद उसने अपने घर के एक कमरे में से बड़ा सा डब्बा लाया।

और उसे डाकिये के हाथ में देते हुए कहा चाचा, मेरी तरफ़ से दीपावली पर यह आपको भेंट है। डब्बा देखकर डाकिया बहुत आश्चर्य में पड़ गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था वह क्या कहे। कुछ देर सोचकर उसने कहा।

तुम तो मेरे लिए बेटी के समान हो तुमसे, मैं उभार कैसे ले सकता हूँ बिटिया रानी? लड़की ने उससे आग्रह किया चाचा मेरे इस गिफ्ट के लिए मना मत करना नहीं तो मैं उदास हो जाउंगी। ठीक है, कहते हुए बूढ़े डाकिये ने पैकेट ले लिया।

और बड़ी प्रेम से लड़की के सिर पर अपना हाथ फेरा मानो उसको आशीर्वाद दे रहा हो। लड़की ने कहा, चाचा इस पैकेट को अपने घर ले जाकर खोलना। घर जाकर जब उस डाकिये ने पैकेट खोला तो वह आश्चर्यचकित रह गया क्योंकि उसमें एक जोड़ी जूते थे।

उसकी आंखें दबदबा गई। डाकिए को यकीन नहीं हो रहा था कि एक छोटी सी लड़की उसके लिए इतना फिक्रमन्द हो सकती है। अगले दिन डाकिया अपने डाकघर पहुंचा और उसने पोस्टमास्टर से फरियाद की कि उसका तबादला फौरन दूसरे इलाके में कर दिया जाए।

पोस्टमास्टर ने जब इसका कारण पूछा तो डाके ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आँखों और रूंधे गले से कहा सर आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूंगा। उस छोटी अपाहिज बच्ची ने मेरे नंगे पांव को तो जूते दे दिए पर मैं उसे पांव कैसे दे पाऊंगा?

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