New Unique Emotional Short Story In Hindi मेरी नई कहानी में ये कहानी मेरी और मेरे बॉस की है। 2025

Unique Emotional Short Story In Hindi

हैलो दोस्तों, स्वागत है आपका मेरी नई कहानी में ये कहानी मेरी और मेरे बॉस की है। मेरा नाम कोमल है। मेरी उम्र अभी 23 साल की है और मैं चंडीगढ़ की रहने वाली हूँ। मैं बहुत एक सामान्य परिवार से हूँ। मेरे घर पर मेरी माँ।

और एक छोटी बहन है। पिताजी कुछ साल पहले गुजर गए तो माँ की जिम्मेदारी घर पर और मुझ पर आ गई। मेरी माँ हॉस्पिटल में नर्स है। उनकी जॉब से हमारा घर बस किसी तरह से चल रहा था। 18 साल की उम्र में मैंने अपनी बारहवीं की

पढ़ाई पूरी कर ली और कुछ काम की तलाश करने लगी पर मुझे मन का काम नहीं मिल पा रहा था पर 1 दिन मेरी किस्मत बदल गई।

एक शाम को सात बजे मैं घर जाने के लिए बस स्टॉप पर खड़ी थी, पर कुछ साधन नहीं मिल पा रहा था। तभी एक कार आकर मेरे बगल में रुकी और कार में सवार आदमी ने मुझसे पूछा कहीं जाओगी क्या आप? मैंने ना मैं अपना सर हिला दिया पर उसने बोला डरो नहीं मुझसे कहा रात होने को है, अगर कहीं जाना है तो बता दो ना।

तो कोई बात नहीं। मैं सोचने लगी कि बात तो सही है कि रात होने वाली है, अब पता नहीं कुछ साधन मिले भी या नहीं? तो मैंने उन्हें बता दिया। वह बोला मैं वहीं से होकर गुजरूंगा चलो तो चल सकती हूँ। मैं पीछे वाली सीट पर बैठ गई कुछ दूर जाने के।

बाद ही उसने मुझसे पूछा क्या करती हो? मैं बोली अभी कुछ नहीं कर रही। अभी बस हैयर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की है। हम दोनों ऐसे ही बात करते रहे। उसको इतना तो पता चल गया था कि मैं काम की तलाश कर रही हूँ पर उसने कुछ बोला नहीं।

ऐसे ही मेरा घर आ गया और मैं गाड़ी रोकने को बोली। गाड़ी रुकने पर मैं उतर गई और थैंक्स बोली। उसने मुझे रुकने को कहा और मुझे अपना कार्ड दिया और बोला अगर काम की जरूरत हो तो मेरे ऑफिस में कुछ जगह खाली है अगर।

ना हो तो एक बार आकर देख लेना। मैंने कार्ड लिया और थैंक्स बोल कर घर चल दी। पहले तो मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया पर रात में सोते वक्त उस आदमी की बात याद आई। मैंने तुरंत उठकर अपने पर्स से कार्ड निकाला और देखा तो किसी सॉफ्टवेयर कंपनी का लग रहा था। मैंने वहाँ जाने की सोंची मगर

New Emotional Short Story In Hindi मेरा नाम सोनाली है और यह मेरी दूसरी शादी है। मेरे पहले पति का मेरी शादी के कुछ ही दिनों बाद एक 2025

अगले दिन रविवार था तो सोमवार का जाने का तय कर दिया। सोमवार को मैं जल्दी उठकर तैयार हुई और ऑटो लेकर वहाँ पहुँच गई। वहाँ जाकर देखा तो बहुत ही बड़ा और शानदार ऑफिस था। मैंने वहीं बैठी एक महिला के पास जाकर कार्ड दिखाया तो उसने मुझे एक नंबर।

रूम में जाने को कहा। मैंने रूम के दरवाजे पर जाकर अंदर आने की अनुमति ली। अंदर जाते ही देखा तो सामने वही आदमी था। उसने मुझे देखते ही कहा अरे तुम आओ आओ बैठो, मैं बैठ गई। उसने कहा जरूर तुम काम के लिए यहाँ आई होगी। मैं बोली, जी हाँ, उसने मेरे सभी कागज़ चेक किए और कहा।

मुझे एक सेक्रेटरी की जरूरत है। अगर तुम यह काम कर सको तो तुम्हें काम मिल सकता है। घबराने की जरूरत नहीं है। है, तुम धीरे धीरे सीख जाओगी, मैं तुरंत हाँ बोल दी तो उन्होंने कहा, शुरू में तुमको 14,000 मिलेंगे बाद में तुम्हारे काम के ऊपर है कि कितना बढ़ती है वह?

बोले कल से ही आ जाओ, मैं खुश होकर बोली जी जरूर और फिर मैं घर आ गई। घर में भी सब लोग बहुत खुश थे। अगले दिन से ही मैं काम पर जाने लगी पर मुझे ज़रा सा भी अंदाजा नहीं।

कि यहाँ से मेरी जिंदगी ही पूरी बदलने वाली थी। वक्त बीतता गया और पांच महीने कब गुजर गए तो पता नहीं चला। अब मैं बॉस का सब काम सीख चुकी थी और पूरी मेहनत से काम करती थी। कुछ दिनों बाद मुझे कुछ ऐसा पता चला कि मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। मुझे पता लगा कि पहले भी कई लड़कियां यहाँ काम

कर चुकी है मगर ज्यादा दिन कोई टिक नहीं सकी। ऑफिस के कुछ लोगों से पता लगाया कि मेरे बॉस कुछ रोमेंटिक टाइप के हैं, पर मेरे साथ अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।

वहाँ तो विश्वास नहीं हुआ। मैं अपना काम करती रही। 1 दिन रविवार की छुट्टी थी, मगर बॉस ने कहा कुछ काम है, ऑफिस में तो तुमको आना होगा। उस दिन मैं घर से ऑफिस के लिए निकली तो बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी। मैंने ऑटो लिया और जल्दी अचानक ऑटो में पानी के कारण कुछ खराबी आ गई। बहुत कोशिश के बाद।

भी ऑटो स्टार्ट नहीं हुई। मेरा ऑफिस वहाँ से बस कुछ ही दूर बचा था तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं पैदल ही चली जाऊं और मैं जल्दी जल्दी जाने लगी। मगर बारिश इतनी तेज़ थी कि वहाँ पहुंचते पहुंचते में भीग चुकी थी। मैं अंदर गई तो बॉस मुझे देख कर।

बोले अरे तुम तो पूरी भीग गई, कैसी लड़की हो, कुछ देर रुक जाती, कहीं मुझे भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ? यहाँ तो कोई कपड़े भी नहीं थे मेरे पास। उस दिन मेरे और बॉस के अलावा और कोई भी ऑफिस में नहीं।

कहा, बॉस ने मुझे एक टॉवल दिया और सर पोछने को कहा, मैं सर पोछने लगी। कुछ देर बाद अचानक ने मेरी नजर बॉस पर पड़ी तो वह मुझे घूरे जा रहे थे। बॉस ने कहा जाओ अंदर वाले रूम में जाकर कपड़े सुखा लो और मैं रूम में चली गई। वहाँ पंखा चालू किया और।

अपने कपड़े उतार के टॉवल लपेट ली। अपने गीले कपड़ों को मैंने फैला दिया ताकि कुछ सूख जाए में वैसे ही टेबल पर बैठ गई। अचानक दरवाजे पर आवाज़ हुई। मैं बोली जी सर बाहर बॉस थे। वह बोले अंदर एक फाइल है, वह चाहिए मैंने डरते डरते दरवाज़ा खोला, मुझे बहुत ललचा हुआ।

भरी निगाह से देख रहे थे और मैं सर झुका के खड़ी थी। वह अंदर आए और मेरे कपड़ों को देखा, फिर फाइल देखने लगे।

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