Very Short Story In Hindi मेरा नाम राज़ है, मैं बनारस से हूँ। ये कहानी उस समय की है जब मैं कॉलेज में था, 2025

Very Short Story In Hindi

मेरा नाम राज़ है, मैं बनारस से हूँ। ये कहानी उस समय की है जब मैं कॉलेज में था, उसी समय मेरे घर के बगल वाले घर में एक नया परिवार रहने के लिए आया। एक 2 दिन बाद पता चला कि उस परिवार में एक भैया है जो किसी कंपनी में काम करते हैं। उनको अपने काम से कई बार शहर से बाहर भी जाना होता था।

उनके घर में उनके माता पिता, एक छोटी बहन और उनकी बीवी रहते थे। मैं सुबह ही अपने कॉलेज निकल जाता था, फिर सीधे शाम को ही घर आ जाता था। सिर्फ रविवार को ही बगल के परिवार से मेरी बातचीत होती थी। वे भी सिर्फ अंकल आंटी थे। इसी तरह लगभग दो तीन महीने बीत गए। एक शाम को माँ ने बोला, बेटा।

पड़ोस की आंटी आई थी, वह तुमको पूछ रही थी, मैंने पूछा उनको क्या काम था तो माँ बोली वह सब मुझे नहीं पता तो उनके घर जाकर ही पूछ ले। मैं शाम को आंटी के घर गया और उनके घर की घंटी बजाई। एक दो बार घंटी बजाई पर कोई भी नहीं निकला। मैं जैसे ही वहाँ से जाने को हुआ तो अंदर से आवाज आई, रुकिए आती हूँ।

एक पल बाद जब दरवाजा खुला तो मैंने देखा कि एक बहुत ही सुन्दर औरत खड़ी थी। वह लगभग मेरी ही उम्र की थी। मैं जैसे ही कुछ बोलने जा रहा था, वह सामने से बोल पड़ी आप राज़ हो ना? मैंने हाँ में से दिलाया। भाभी बोली मुझे माफ़ कर दीजिए, दरवाजा खोलने में थोड़ी देर हो गई क्योंकि अभी भी मैं ना कर सीधे बाथरूम से आ रही हूँ।

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मैंने पूछा आंटी ने मुझे क्यों बुलाया था तो भाभी बोली आज मेरी ननंद का जन्मदिन है और शाम को एक छोटी सी पार्टी है। मैं बोला इसमें मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ? भाभी मुस्कराते हुए बोली तुम अंदर भी आओगे, यह सारी बात दरवाजे पर ही करोगी? मैं उसके साथ अंदर आ गया। घर में उसके सिवा और कोई नहीं था। मैंने पूछा घर में कोई नहीं है क्या?

उसने बताया हाँ, मेरे ससुर कुछ सामान लेने के लिए बाजार गए हैं और मेरी ननद सा खुल गई है। मेरे पति तो हमेशा की तरह भी बाहर गए हैं। मैं बोली तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाकर लाती हूँ। थोड़ी देर बाद भाभी चाय बनाने चली गई और हम चाय पीते हुए बातें करने लगे। मैंने भाभी से पूछा।

आपने मुझे क्यों बुलाया था? तो भाभी बोली मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी ननंद के जन्मदिन के लिए घर सजाने में मेरी मदद करो। मैंने कहा ठीक है और फिर हम दोनों अपने अपने काम में लग गए। थोड़ी देर बाद भाभी रसोई में चली गई और मैं घर को सजाने में लग गया। फिर थोड़ी देर बाद अचानक से इधर रसोई से आवाज आई।

राज़ जल्दी धराओ मैं दौड़ कर गया तो देखा की भाभी रसोई में की थी। मैंने पूछा अरे भाभी क्या हुआ? उसने बताया, मेरे सामने एक चूहा आ गया था तो मैं भागी और दरवाजे से मेरे पैर में चोट लग गई। मैं बोला अरे यार कितनी डरपोक हो अब तो तुम ठीक हो ना।

वो बोली मुझसे उठाने जा रहा है, प्लीज़ मेरी हेल्प कर दो, मैं भाभी को आज से पकड़ कर उठाने लगा। वह कराते हुए बोली मैं उठ भी नहीं सकती तो चलने की तो दूर की बात है तो मैंने भाभी को सहारा दिया। कुछ कदम चलते ही वह फिर से सोफे पर बैठ गई और बोली अब नहीं चला जा रहा है और गर्मी भी बहुत लग रही है।

मैं बोला आप अंदर रूम में चलिए, मैं कूलर बंद कर देता हूँ भाभी बोली बहुत दर्द हो रहा है, अब तो थोड़ा भी नहीं चला जाता, मैंने एस्कर कहा तो आपको गोद में उठा लूँ? भाभी झट से बोली तुम मुझे उठा पाओगे, मैंने बोला हाँ क्यों नहीं भाभी भाभी ने कहा यदि तुमने मुझे उठा लिया तो मैं शाम को तुम्हें एक गिफ्ट दूंगी।

मगर ये बात तुम भैया को नहीं बताना। मैंने बात समझते हुए कहा ठीक है पर आप भी किसी को कुछ नहीं बताना। भाभी मुस्करा कर बोली मैं किसी को क्यों बताऊँगा। इतना सुनते ही मैंने भाभी को उठा लिया और उन्हें बैडरूम में ले जाने लगा। मेरा तो बुरा हाल था। एक जवान खूबसूरत भाभी मेरी गोद में थी।

मुझे समझने में देर नहीं लगी कि भाभी क्या चाहती हैं? मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और कूलर ऑन कर दिया। मैंने उससे पूछा अब बताओ मेरा गिफ्ट कहाँ है? मैं आपको यहाँ तक ले आया हूँ। भाभी इस पर कहने लगी श्याम को आ जाना, मैं भरपूर इनाम दूंगी। मेरी समझ में आ गया था कि भाभी मुझे क्या इनाम दे सकती हैं?

मैंने भाभी से पूछा आपकी चोट कैसी है? भाभी बोली हाँ अभी दर्द है, उस अलमारें में बाम रखी है थोड़ा ला दो में उसे लगा लूँ में तुरंत बाम ले आया और बोला भाभी में लगा दूँ, भाभी बोली में खुद ही लगा लूंगी। भाभी ने मेरे सामने ही अपनी साड़ी उठा दी ओर बाम लगाने लगी।

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आप समझ ही सकते हो उस वक्त मेरा क्या हाल हो रहा होगा तो ये भाभी बोली लगता है मेरे कमरे में भी चोट आई है, पर मेरा हाथ वह नहीं पोछ रहा है। मैंने पूछा भाभी मैं लगा दूँ, भाभी ने बोला नहीं जाने दो मैं किसी तरह लगा लूंगी मगर भैया को पता चल गया।

कि मैंने किसी और से कमर की मालिश करवाई है तो बवाल हो जाएगा। मैं बोला भईया को ये बताएगा कौन? मैं तो नहीं बताऊँगा शायद आप बता दो भाभी हस्कर बोली मैं क्यों बताऊँगा मैं बोला तो लाओ बा मुझे दो, मैं आपकी कमर की मालिश कर देता हूँ।

भाभी ने मुझे बाम देकर लेट गई और फिर मैं भाभी की कमर की मालिश करने लगा। थोड़ी देर बाद वह बोली, अब तुम अपने घर जाओ, बाकी का काम शाम में करेंगे। मैंने एक तरकीब लगाई और कहा मैं जा रहा हूँ, आप दरवाजा बंद कर लो। मैं जल्दी से उठा और दीवार के कोने में छिप गया भाभी के।

गेट बंद करने तक मैं उनके घर ही में अच्छे से छुपा रहा हूँ। भाभी वापस बिस्तर पर जाने की बजाय होल में चली गई। मैंने देखा कि भाभी का पैर एक दम ठीक था और वो अच्छे से चल रही थी। मेरी समझ में आ गया कि ये बैसेक बहाना था। मेरा मन तो कर रहा था कि अभी भाभी के पास घर आ जाऊं मगर मैंने अपने मन को शांत किया।

उसके बाद जो मैंने देखा मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मैंने देखा कि बाबी सोफे पर आकर बैठ गई और टीवी पर वह वाली फ़िल्म चालू कर दी और देखने लगी। यह सब देखकर तो मैं हक्का बक्का रह गया। वह टीवी को देखते हुए बोली, मेरा पति तो साला कई दिनों तक बाहर ही रहता है।

उसको तो मेरी बिलकुल भी परवाह नहीं रहती। इतना सुनते ही मेरे।

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